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दिल्ली में हारी आम आदमी पार्टी तो इस पार्टी पर फूटेगा ठीकरा, बनाया है खास प्लान

Thu, 23 May 2019 09:23 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राहुल-केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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आम आदमी पार्टी (आप) ने मतगणना के बाद की सियासी तस्वीर को अपने हक में रखने की योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। खासतौर से एग्जिट पोल आने के बाद से, जिसमें भाजपा के पास सातों सीटें जाती दिख रही हैं।

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परिणाम एग्जिट पोल जैसे रहे तो आप ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के साथ ही कांग्रेस पर भी हमलावर रहेगी। इस दौरान दिल्लीवालों को यह संदेश देने की कोशिश होगी कि भाजपा को कांग्रेस की वजह से विजय मिली। कांग्रेस के समझौता कर लेने से दिल्ली की सातों सीटों पर भाजपा को हराया जा सकता था। पार्टी इसके लिए बाकायदा आंकड़े भी पेश करेगी।

आप की मौजूदा रणनीति का आधार बीते लोक सभा चुनाव का परिणाम है। 2014 के चुनाव में भाजपा को 46.4 फीसदी, आप को 32.9 फीसदी व कांग्रेस को 15.1 फीसदी वोट मिले थे।
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इस बार के वोटिंग पैटर्न के आधार पार्टी मान रही है कि भाजपा की तुलना में आप व कांग्रेस का कुल मत प्रतिशत कमोबेश पिछले चुनाव जैसा ही होगा। इतना संभव जरूर है कि कांग्रेस का अपना वोट प्रतिशत इस चुनाव में बढ़ जाए, लेकिन कांग्रेस व आप के बीच भाजपा विरोधी वोट बंटवारे ने भाजपा की राह आसान कर दी है।

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परिणाम आने पर शिकस्त होने की हालत में आप रणनीतिकार इसकी सारी जिम्मेदारी कांग्रेस पर डालेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के चुनाव प्रचार के दौरान भाषण का सहारा लिया जाएगा। इसमें कांग्रेस व आप के बीच समझौते की दुहाई देते हुए केजरीवाल बातचीत टूटने का आरोप कांग्रेस पर लगाते रहे हैं।

इतना ही नहीं, उन्होंने कई सभाओं में भी इस बात को दोहराया है कि दिल्ली में कांग्रेस को वोट देने से भाजपा जीत जाएगी। केजरीवाल की इस आशंका को प्रमाण के साथ पार्टी लोगों के बीच पेश करेगी।

केजरीवाल ने अखिलेश यादव से की बात
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मौजूदा सियासी हालात पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने लोक सभा चुनाव परिणाम आने के बाद की रणनीति पर भी बात की। आप सांसद संजय सिंह ने बताया कि केजरीवाल व अखिलेश के बीच फोन पर संवाद हुआ। लखनऊ में मौजूद अखिलेश ने देश की मौजूदा सियासी हालात पर चर्चा की। केजरीवाल व अखिलेश ने चुनाव के परिणाम आने के बाद पैदा होने वाले सियासी परिदृश्य पर भी बात की। दोनों इस बात पर  सहमत थे कि भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकना उनकी प्राथमिकता में है।
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