लोकसभा चुनाव में भले ही राजधानी में मतदान कम हुआ हो, लेकिन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में जबरदस्त मतदान हुआ था। इन विधानसभा क्षेत्रों में 68 फीसदी से भी ज्यादा मतदान देखने को मिला था। सियासी गलियारों में भी अल्पसंख्यक मतों को लेकर तरह तरह के कयास भी लगाए जा रहे थे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो यहां तक कह दिया था कि मुस्लिम वोट कांग्रेस में चले गए। चुनाव आयोग के आंकड़ों इस दावे की सच्चाई भी पता चली। दिल्ली में 8 मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र माने जाते हैं, जिनमें से पांच क्षेत्रों में कांग्रेस का जबरदस्त दबदबा देखने को मिला। जबकि दो क्षेत्रों में भाजपा को बढ़त मिली, लेकिन सभी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन तीसरे नंबर पर ही रहा।
दिल्ली की आठ मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को सर्वाधिक 4,10,107 मत मिले। जबकि भाजपा को कांग्रेस की तुलना में 30252 वोट कम मिले। भाजपा को इन सभी सीटों पर कुल वोट 379855 वोट मिला। जबकि तीसरे नंबर पर रही आम आदमी पार्टी को 133,737 वोट के साथ करारा झटका लगा है।
उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की बाबरपुर विधानसभा में भाजपा और कांग्रेस की जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। यहां भाजपा को कांग्रेस से करीब 600 वोट ज्यादा मिला है। इस सीट पर कांग्रेस की प्रत्याशी शीला दीक्षित को 57227 तो भाजपा के मनोज तिवारी को 57827 वोट मिला। जबकि चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र की बल्लीमारान, चांदनी चौक, मटिया महल के अलावा पूर्वी दिल्ली लोकसभा की ओखला और उत्तर पूर्वी दिल्ली की सीलमपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस को सबसे ज्यादा वोट मिला है। वहीं भाजपा को पूर्वी दिल्ली की त्रिलोकपुरी और उत्तर पूर्वी की मुस्तफाबाद विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा वोट मिला है।