लोकसभा चुनाव में हुए मतदान के पैटर्न को अनुसार अगर दिल्लीवासी विधानसभा में भी वोट करें तो दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (आप) का खाता खुलना संभव नहीं होगा। वहीं, कांग्रेस के पास सिर्फ पांच विधायक होंगे। विधानसभा में भाजपा की स्थिति वैसी ही होगी जैसी 2015 विधानसभा चुनाव में आप की थी।
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को विधानसभा के हिसाब से तीनों दलों को मिले मतों के आंकड़े जारी किए हैं। इसमें भाजपा अपने प्रतिद्वंदियों कांग्रेस व आप से बहुत आगे नजर आ रही है। दिल्ली के 70 सीटों में से 65 सीटों पर भाजपा की बढ़त है। इसमें चार लोकसभा क्षेत्रों में आने वाली सभी विधान सभाएं भाजपा के खाते में जा रही हैं। वहीं, तीन अन्य लोकसभा क्षेत्रों में भी भाजपा का प्रदर्शन बेहतरीन है। चांदनी चौक लोकसभा की सात विधान सभा सीटों पर भाजपा की बढ़त है, जबकि पूर्वी व उत्तर पूर्वी दिल्ली की 9-9 सीटों पर पार्टी आगे है।
दूसरी तरफ कांग्रेस पांच सीटों पर भाजपा व आप से आगे है। इसमें मटिया महल, बल्ली मारान, सीलमपुर, ओखला व चांदनी चौक विधान सभाएं हैं। कांग्रेस 42 सीटों पर नंबर दो व 23 सीटों पर नंबर पर है। वहीं, आप किसी भी सीट पर लीड नहीं ले रही है। आप 47 सीटों पर नंबर तीन व 23 सीटों पर नंबर दो पर है। खास बात यह कि आधी से ज्यादा सीटों पर कांग्रेस व आप को मिले वोट भाजपा से कम हैं। ऐसे में अगर कांग्रेस व आप के बीच गठबंधन भी होता है और दिल्लीवालों के मूड में बदलाव नहीं आता तो भी भाजपा की दोनों पर बढ़त रहेगी।