कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटर आप के साथ चले गए थे, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस मान रही है कि यह समुदाय उसके जुड़ गया है। दिलचस्प ये है कि ओखला के अलावा ज्यादातर मुस्लिम बहुल विधानसभाओं से जमकर वोट पड़े हैं। बल्ली मारान में 68.3, मटिया महल में 66.9, सीलमपुर में 66.5, त्रिलोकपुरी में 65.4, मुस्तफाबाद में 65.2, बाबरपुर में 62.1 फीसदी वोट पड़े हैं। कांग्रेस के रणनीतिकार बताते हैं कि अगर आरक्षित सीटों पर भी कांग्रेस के हक में वोट पड़े होंगे, तो सभी सातों सीटों पर कांग्रेस रनर/विनर के बीच में रहेगी।
आप को एससी मतदाताओं से उम्मीद ज्यादा
आम आदमी पार्टी को उम्मीद है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी अनुसूचित जाति के वोटर उसके साथ गए होंगे। विधानसभा चुनाव में सभी 12 आरक्षित सीटों पर आप को जीत मिली थी। लोकसभा चुनाव में भी आरक्षित सीटों पर जमकर वोटिंग हुई है। ज्यादातर आरक्षित सीटों पर औसत 60.34 फीसदी से ज्यादा वोट पड़े हैं। सबसे ज्यादा 67.51 फीसदी वोट गोकलपुर में पड़े। वहीं, सीमापुरी में 67.4 फीसदी, कोंडली में 65.79, त्रिलोकपुरी मेें 65.36, मंगोलपुरी में 63.74, मादीपुर में 63.72 और आंबेडकर नगर में 62.81 वोट पड़े हैं। पार्टी रणनीतिकार मान रहे हैं कि विधानसभा चुनाव की तरह अगर मुस्लिम समुदाय का वोट आप से दूर नहीं गया होगा, तो वह सातों सीटों पर नंबर एक या दो की पोजीशन में रहेगी।
2014 के लोकसभा चुनाव
तीनों दलों को मिले वोट
भाजपा 46.4 फीसदी
आप 32.9 फीसदी
कांग्रेस 15.1 फीसदी
मिली सीटें
भाजपा को सातों सीटें मिली थी।
आप सभी सातों सीटों पर व कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही थी।
2015 के विधानसभा चुनाव
तीनों दलों को मिले वोट
आप 54.3 फीसदी
भाजपा 32.1 फीसदी
कांग्रेस 9.8 फीसदी
मिली सीटें
आप को 67 सीटों पर जीत मिली थी।
भाजपा तीन सीटों पर सिमट गई और कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली।