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दिल्ली: त्रिकोणीय मुकाबले में नंबर-2 की भी अहमियत, विधानसभा चुनाव की कुंजी साबित होगा परिणाम

Wed, 15 May 2019 06:08 AM IST
देव कश्यप संतोष कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नरेंद्र मोदी-राहुल गांधी (फाइल फोटो)
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दिल्ली के त्रिकोणीय मुकाबले में विजेता के साथ नंबर-दो की पोजीशन भी खास हो गई है। लोकसभा चुनाव का परिणाम आठ महीने बाद 2020 में होने वाले विधानसभा चुनाव की कुंजी साबित होगा। बीते लोकसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर रही कांग्रेस का 2015 के विधानसभा चुनाव में सूपड़ा साफ हो गया था। ऐसे में तीनों दलों के रणनीतिकार दिल्ली में क्षेत्रवार पड़े वोटों के हिसाब से परिणाम आने से पहले इसकी माथापच्ची में जुुट गए हैं।

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इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में तीसरे स्थान रही कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी। जानकारों की मानें तो लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर भाजपा विरोधी मतदाताओं की पहली पसंद आप हो गई थी। कांग्रेस अपने मतदाताओं को यकीन नहीं दिला सकी थी कि वह भाजपा को शिकस्त दे सकती है। यहां तक कि कांग्रेस का अपना वोट बैंक भी आप की तरफ चला गया। इसका असर फरवरी 2015 के विधानसभा चुनाव में भी देखा गया। आप ने दोनों दलों को पीछे छोड़ते हुए दिल्ली में क्लीन स्विप किया था।

बीते रविवार की वोटिंग पैटर्न के आधार पर तीनों दलों के रणनीतिकार मान रहे हैं कि भाजपा सातों सीटों पर टक्कर में है। नई दिल्ली, चांदनी चौक व पश्चिमी दिल्ली में भाजपा का सीधा मुकाबला कांग्रेस से है, जबकि दक्षिणी दिल्ली व उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में आप के साथ। पूर्वी दिल्ली व उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भिड़ंत त्रिकोणीय है। माना जा रहा है कि हर पार्टी का कोर वोटर उसके साथ बना हुआ है। ऐसे में अनुसूचित जाति व मुस्लिम मतों का दल विशेष की तरफ झुकाव दूसरे व तीसरे नंबर की पोजीशन तय करने में निर्णायक होगा।

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मुस्लिम वोटों से कांग्रेस को आस

कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटर आप के साथ चले गए थे, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस मान रही है कि यह समुदाय उसके जुड़ गया है। दिलचस्प ये है कि ओखला के अलावा ज्यादातर मुस्लिम बहुल विधानसभाओं से जमकर वोट पड़े हैं। बल्ली मारान में 68.3, मटिया महल में 66.9, सीलमपुर में 66.5, त्रिलोकपुरी में 65.4, मुस्तफाबाद में 65.2, बाबरपुर में 62.1 फीसदी वोट पड़े हैं। कांग्रेस के रणनीतिकार बताते हैं कि अगर आरक्षित सीटों पर भी कांग्रेस के हक में वोट पड़े होंगे, तो सभी सातों सीटों पर कांग्रेस रनर/विनर के बीच में रहेगी।

आप को एससी मतदाताओं से उम्मीद ज्यादा
आम आदमी पार्टी को उम्मीद है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी अनुसूचित जाति के वोटर उसके साथ गए होंगे। विधानसभा चुनाव में सभी 12 आरक्षित सीटों पर आप को जीत मिली थी। लोकसभा चुनाव में भी आरक्षित सीटों पर जमकर वोटिंग हुई है। ज्यादातर आरक्षित सीटों पर औसत 60.34 फीसदी से ज्यादा वोट पड़े हैं। सबसे ज्यादा 67.51 फीसदी वोट गोकलपुर में पड़े। वहीं, सीमापुरी में 67.4 फीसदी, कोंडली में 65.79, त्रिलोकपुरी मेें 65.36, मंगोलपुरी में 63.74, मादीपुर में 63.72 और आंबेडकर नगर में 62.81 वोट पड़े हैं। पार्टी रणनीतिकार मान रहे हैं कि विधानसभा चुनाव की तरह अगर मुस्लिम समुदाय का वोट आप से दूर नहीं गया होगा, तो वह सातों सीटों पर नंबर एक या दो की पोजीशन में रहेगी।

2014 के लोकसभा चुनाव
तीनों दलों को मिले वोट
भाजपा        46.4 फीसदी
आप        32.9 फीसदी
कांग्रेस        15.1 फीसदी

मिली सीटें
भाजपा को सातों सीटें मिली थी।
आप सभी सातों सीटों पर व कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही थी।

2015 के विधानसभा चुनाव 
तीनों दलों को मिले वोट
आप        54.3 फीसदी
भाजपा        32.1 फीसदी
कांग्रेस        9.8 फीसदी

मिली सीटें
आप को 67 सीटों पर जीत मिली थी।
भाजपा तीन सीटों पर सिमट गई और कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली।
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