कोरोना वायरस से बचाव के लिए प्रधानमंत्री द्वारा किए गए 21 दिनों के लॉकडाउन के बाद से अपने गांव पलायन करने वाले कुछ प्रवासी कामगार रविवार सुबह आनंद विहार पर मिले। यह सब गाजियाबाद के लाल कुंआ जाने के लिए यहां से गुजर रहे थे। अमर उजाला ने इन लोगों से बातचीत की।
यहां मौजूद गोरखपुर के रहने वाले प्रवेश का कहना है कि भैया जी, एक साल से दिल्ली की एक निजी कंपनी में गार्ड की नौकरी कर रहा हूं। 12 हजार वेतन है। पिछले महीने का जो वेतन मिला था, उससे अब तक का तो काम चल गया, लेकिन बचे हुए करीब 800 रुपये में पेट की भूख शांत करूं या अगले महीने के कमरे का किराया दूं। प्रवेश ने कहा कि दिल्ली के मुनिरका में किराए के मकान में रहता हूं। मकान मालिक को उनकी समस्या पता है, लेकिन फिर भी उनसे किराया मांगा और कहा कि या तो किराया दे दो वरना मकान खाली कर दो। साहब खाने के पैसे हैं नहीं किराया कहां से दें, यहां भुखमरी से मरने से अच्छा है, गांव में जाकर खेत में काम करेंगे, अब कभी दिल्ली वापस नहीं जाऊंगा।
मदद मिलती तो नहीं जाते
प्रवेश से जब यह कहा गया कि दिल्ली में तो मदद मिल रही है। खाने के लिए भी इंतजाम किया गया है। इस पर प्रवेश का जवाब था कि अगर उन्हें मदद मिलती तो वह दिल्ली से नहीं जाते, लेकिन अभी तक मदद के लिए कोई संपर्क नहीं किया है। कुछ लोग झुग्गी में रहने वाले की मदद कर रहे हैं, लेकिन किराए के मकान में रहने वालों के पास कोई संपर्क नहीं कर रहा है।