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लॉकडाउन ने दूर की यमुना की ‘पीर,’ बहने लगा शुद्ध ‘नीर’

Wed, 22 Apr 2020 06:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
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निर्मल हुई यमुना - फोटो : अमर उजाला
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सालभर प्रदूषित रहने वाली यमुना नदी का पानी इस कदर साफ हो गया है कि लोगों ने पीने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। वजीराबाद में यमुना घाट के पास रहने वाले हजारों लोग रोजाना यमुना से पानी लेकर जा रहे हैं। उनका कहना है कि नदी का पानी अब बिल्कुल स्वच्छ है।

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राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण कारखाने पूरी तरह से बंद हैं। छोटी इकाइयां भी नहीं चल रही हैं। इसलिए यमुना नदी में गंदे पानी को नहीं डाला जा रहा है। यह उसी का नतीजा है कि नदी का पानी साफ हो गया है। अब लोगों ने इसका इस्तेमाल पीने के लिए भी शुरू कर दिया है। 

वजीराबाद में रहने वाले पंडित लालू बताते हैं कि वजीराबाद घाट के पास रहने वाले सैकड़ों लोग प्रतिदिन नदी से पीने के लिए पानी भरकर ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि वो इस इलाके में 30 साल से रह रहे हैं, लेकिन इतना साफ पानी उन्होंने कभी नहीं देखा। 
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वह खुद पीने के लिए यमुना के पानी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, लॉकडाउन के कारण कारखानों से निकलने वाला गंदा पानी अब यमुना में नहीं गिर रहा है। नदी के साफ होने की सबसे बड़ी वजह यही है।

अभी मानकों पर खरा नहीं
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि औद्योगिक कचरे के बंद होने से और पानी के बहाव की वजह से नदी काफी स्वच्छ है। हालांकि, डीपीसीसी ने ये भी कहा कि भले ही नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है लेकिन अब भी यह मानकों पर खरा नहीं उतरता है। क्योंकि, नदी में अब भी घरेलू नालों का पानी जा रहा है, जो बड़ी समस्या हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगा कि अभी यमुना का पानी पीने के लिए स्वच्छ हो गया है। 

ज्यादा पानी छोड़ना भी स्वच्छता का कारण
डीपीसीसी के एक अधिकारी का कहना है कि इस समय नदी का पानी साफ होेने की वजह लॉकडाउन के अलावा ज्यादा पानी छोड़ा जाना भी है। मार्च में बारिश अच्छी हुई, जिसकी वजह से पिछले साल की तुलना में इस बार ज्यादा पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। बहाव के कारण गंदगी जमा नहीं हो रही है।

40 फीसदी तक घटा प्रदूषण
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, यमुना पानी में अलग-अलग स्थानों पर प्रदूषण में 40 फीसदी तक की कमी देखी गई है। ओखला बैराज पर बीओडी के लिहाज से प्रदूषण में 18 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, निजामुद्दीन ब्रिज पर 20 प्रतिशत, ओखला बैराज पर प्रदूषण में 33 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि आईटीओ पुल पर 21 प्रतिशत की कमी आई है। वजीराबाद के पास खजूरी प्लाटून पूल के पानी में 42 प्रतिशत तक प्रदूषण में कमी आई है।

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