जेल प्रशासन का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान यहां रह रहे कैदियों को पेरोल पर रिहा किया गया था। उसके बाद से ओपन जेल पूरी तरह से खाली हो गई। पेरोल की अवधि खत्म होने के बाद अब इस जेल में कैदियों की वापसी होने लगी है।
दिल्ली की जेलों में क्षमता से दो गुना कैदी बंद हैं। जेल प्रशासन कैदियों की संख्या को लेकर परेशान है। वहीं तिहाड़ में एक ऐसी जेल भी है, जहां काफी अरसे से एक भी कैदी बंद नहीं है। पिछले तीन साल से तिहाड़ की ओपन जेल में एक भी कैदी नहीं है। अब एक बार फिर ओपन जेल के ताले कैदियों के लिए खुल गए हैं।
विज्ञापन
जेल प्रशासन का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान यहां रह रहे कैदियों को पेरोल पर रिहा किया गया था। उसके बाद से ओपन जेल पूरी तरह से खाली हो गई। पेरोल की अवधि खत्म होने के बाद अब इस जेल में कैदियों की वापसी होने लगी है।
फिलहाल ओपन जेल में चार कैदी आए हैं वहीं सेमी ओपन में पांच कैदी बंद हैं। जिस दौरान ओपन जेल में कैदी नहीं थे, उस समय जेल प्रशासन ने अन्य जेल से भीड़ को कम करने के लिए ओपन जेल के नियम के मुताबिक कैदियों की तलाश की थी।
विज्ञापन
जेल प्रशासन ने नियम के मुताबिक ओपन जेल में रहने कैदियों के आवेदन मांगे थे, लेकिन कोई भी कैदी ओपन जेल की सुविधा के योग्य नहीं पाया गया। ओपन जेल में रहने के लिए कई तरह के नियम हैं। सारे नियमों पर खरे उतरने वाले कैदियों को ही यहां रहने की इजाजत होती है।
Trending Videos
साल 2017 में हुई थी शुरुआत
तिहाड़ में साल 2017 में ओपन जेल की शुरुआत हुई थी। इस जेल में 36 कैदियों को रहने की इजाजत है। वहीं तिहाड़ में साल 2013 में सेमी जेल की शुरुआत हुई थी। इस जेल में 60 कैदियों के रहने की क्षमता है।
ऐसी होती है ओपन जेल
ओपन जेल में कैदियों को जेल परिसर से बाहर भी घूमने फिरने की आजादी होती है। ओपन जेल में बंद कैदी जेल में रहने के बावजूद बाहर जाकर काम धंधा कर सकते हैं। शाम को काम खत्म करने के बाद उन्हें वापस जेल में आना होता है। ओपन जेल में कैदियों के लिए एक कमरा, कूलर, एलसीडी, एक कॉमन रूम और परिवार वालों से 10 मिनट तक फोन पर बातचीत करने की सुविधा होती है।
ओपन जेल में रहने के नियम
जेल अधिकारियों के मुताबिक ओपन जेल में वही कैदी रह सकते है, जो दो साल तक सेमी ओपन जेल में रहा हो। सेमी ओपन जेल में वही कैदी रह सकता है जिसने अपनी सजा का दो तिहाई हिस्सा अच्छे आचरण के साथ पूरा कर लिया हो। वहीं जिन कैदियों को को कई बार पैरोल व फरलो पर जेल से बाहर जाने की अनुमति मिली हो, लेकिन इस दौरान उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया हो।