स्थानीय शहरी निकायों के लिए सरकार की ओर से महज 7.5 फीसदी बजट दिया गया है। इनमें उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी निगम सहित अन्य प्राधिकरण और परिषद शामिल हैं। स्वच्छता अभियान, सड़क, स्ट्रीट लाइट, पार्क, सौंदर्यीकरण सहित विकास संबंधी कई बुनियादी कार्यों का जिम्मा स्थानीय निकायों के पास है, ऐसे में निगम अधिकारियों और राजनेताओं की ओर से दिल्ली सरकार पर अक्सर विकास के लिए तयशुदा राशि मुहैया नहीं करवाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।
इससे कई विकास कार्य प्रभावित भी हुए हैं। बजट में दिल्ली के स्थानीय निकायों को 4575 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हालांकि सरकार की ओर से दिल्ली के नगर निगमों पर दिल्लीवासियों के साथ अन्याय के आरोप लगाए गए हैं। सरकार की दलील है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा होता तो दिल्ली की एक-एक गली साफ सुथरी होती।
सड़क और गलियों पर खर्च होंगे 800 करोड़
दिल्ली सरकार ने मुख्यमंत्री सड़क पुनर्निर्माण योजना के तहत 2018-19 से शहरी निकायों, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी, नियमित व अनधिकृत कॉलोनियों में सड़क और गलियों के विकास कार्य की शुरुआत की है। इस योजना के तहत राशि संबंधित स्थानीय निकायों या कार्यकारी एजेंसी को स्थानीय विधायक की अनुशंसा के मुताबिक जारी की जाती है। 2019-20 के बजट में इस योजना के तहत 800 करोड़ रुपये की राशि प्रस्तावित है।
विधायकों के सहयोग से क्षेत्रीय विकास के लिए 800 करोड़
दिल्ली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के विकास के लिए विधायक के सहयोग से स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम को प्रोत्साहित किया गया है। विधायकों को अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को कारगर तरीके से पूरा करने के लिए 2019-20 में इस योजना के तहत 800 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए गए हैं।