राजधानी में कचरे के पहाड़ कम करने और स्रोत पर ही कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को अनिवार्य बनाने की दिशा में एमसीडी ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। इस कड़ी में एमसीडी ने अब तक अपने सभी 12 जोनों में 4,500 से अधिक बल्क वेस्ट जनरेटर की पहचान कर ली है, जबकि अनुमान है कि एमसीडी क्षेत्र में ऐसे संस्थानों की संख्या करीब 50 हजार है।
इन सभी को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत अपने परिसर में ही कचरे का पृथक्करण, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित करना होगा। एमसीडी का मानना है कि इससे तीनों लैंडफिल स्थलों पर पहुंचने वाले कचरे की मात्रा में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी। एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक, बल्क वेस्ट जनरेटर में बड़े आवासीय परिसर, होटल, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय, मॉल, औद्योगिक इकाइयां, कार्यालय परिसर और अन्य बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ठोस कचरा उत्पन्न होता है। ऐसे संस्थानों को अब अपने परिसर में ही गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण व वैज्ञानिक तरीके से उसका प्रबंधन करना होगा, ताकि एमसीडी के संग्रहण तंत्र और लैंडफिल स्थलों पर दबाव कम किया जा सके।
एमसीडी ने स्पष्ट किया है कि बल्क वेस्ट जनरेटर के मामले में सरकारी और निजी संस्थानों के बीच कोई भेद नहीं किया गया है। नियम, 2026 के पैरा-6 के अनुसार जो भी संस्था निर्धारित मानकों के तहत बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आती है, उस पर समान नियम लागू होंगे। यानी सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रम, निजी कंपनियां और अन्य संस्थान सभी को इन नियमों का पालन करना होगा। इस पूरी व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए एमसीडी ने आईआईटी दिल्ली के साथ साझेदारी की है।
आईआईटी दिल्ली नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित करने, तकनीकी परामर्श देने और विभिन्न संस्थानों को मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में एमसीडी की सहायता करेगा। इसी दिशा में एमसीडी ने बल्क वेस्ट जनरेटरों से निकलने वाले कचरे के संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण के लिए एजेंसियों को सूचीबद्ध (एम्पैनल) करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। सक्षम प्राधिकारी की 19 जून की मंजूरी के बाद पश्चिमी जोन के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी किया है। इसके तहत ऐसी एजेंसियों का पैनल तैयार किया जाएगा, जो बल्क वेस्ट जनरेटरों को कचरा प्रबंधन प्रणाली स्थापित करने और उसके संचालन में तकनीकी एवं परिचालन सहयोग प्रदान करेंगी।
आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 17 जुलाई
एमसीडी के अनुसार, इच्छुक एजेंसियों के साथ प्री-बिड बैठक आयोजित की जाएगी, जबकि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 17 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। एमसीडी का मानना है कि यदि संभावित 50 हजार बल्क वेस्ट जनरेटर नियमों के अनुरूप अपने स्तर पर कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन शुरू करते हैं, तो दिल्ली में लैंडफिल स्थलों पर कचरे का बोझ घटाने, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने और स्वच्छ एवं टिकाऊ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।