संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। विश्व अनुवाद दिवस पर साहित्य अकादमी ने बुधवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अनुवाद विषय पर साहित्य मंच कार्यक्रम का आयोजन किया। वरिष्ठ अनुवादक सुभाष नीरव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय से आईं भावना सक्सैना ने मंत्रालय की तरफ से किए जा रहे हैं प्रयासों की चर्चा करते हुए अनुवादिनी, कंठस्थ और भाषिणी एप के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि हम मशीनी अनुवाद पर पूरी तरह निर्भर नहीं रह सकते। हर अनुवाद को मानवीय स्पर्श से ही बेहतर बनाया जा सकता है। मशीनें भी हमारी पहल से ही सुधारी जा सकती हैं।
जामिया मिल्लिया से पधारीं प्रख्यात अनुवादिका निशात जैदी ने कहा कि मशीनें भी हमारी तरह निरंतर सीखती हैं और अपना स्तर सुधारती हैं। हमारी तरफ से दिया गया डेटा ही इन्हें अच्छा बनाने का कार्य करता है।
गुजराती अनुवादक योगेश अवस्थी ने अनुवाद सुधार में एआई द्वारा किए जा रहे सरकारी प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुभाष नीरव ने कहा कि सरकारी कार्यालयों या शैक्षिक संस्थानों के लिए तो अनुवाद के कई एप हैं लेकिन साहित्यिक अनुवाद के लिए कोई विश्वसनीय एप नहीं है। कार्यक्रम का संचालन साहित्य अकादमी में उप सचिव देवेंद्र कुमार देवेश ने किया।