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Mouth Cancer: कोविड की तरह रैपिड किट से होगी मुंह के कैंसर की पहचान, चल रहा है क्लीनिकल ट्रायल

Fri, 25 Oct 2024 08:56 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुंह के कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं। हर साल करीब 1.5 लाख से अधिक नए मामले सामने आते हैं। इनमें 70 फीसदी मामले पुरुषों में देखे जाते हैं। मुंह के कैंसर के लिए सबसे बड़ी वजह तंबाकू सहित अन्य का सेवन है। 
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लार में ट्यूमर के अंश से प्रोटीन में होने वाले बदलाव को पकड़ेगी किट - फोटो : freepik
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विस्तार
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कोविड की तरह जल्द ही रैपिड किट से मुंह के कैंसर की पहचान हो सकेगी। अनुवाद स्वास्थ्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान के छात्रों ने रैपिड किट तैयार की है। किट में मौजूद तत्व लार में मौजूद ट्यूमर के अंश से प्रोटीन में होने वाले बदलाव को पकड़ता है। यदि प्रोटीन में किसी भी प्रकार का बदलाव होता है तो किट पर दो रेखा बन जाती है। सामान्य रहने पर एक रेखा ही बनती है। फिलहाल किट का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। अभी तक आए परिणाम बेहतर है। शुक्रवार को दिल्ली में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल व मेडिसिन सेंस फ्रंटियर्स ने कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें छात्रों ने इस किट को प्रस्तुत किया।

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किट को बनाने वाली छात्रा डॉ. जयंती कुमारी ने बताया कि मौजूदा समय में मानवीय रूप से मुंह को देखकर आकलन किया जाता है। इसमें 50 से 60 फीसदी की सटीकता होती है। वहीं किट की मदद से जांच करने पर 90 फीसदी की सटीकता मिल रही है। इसका इस्तेमाल कोई भी कर सकता है। फिलहाल पीजीआई चंडीगढ़, सीसीएचआरसी असम सहित अन्य जगहों पर इसका क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।

हर साल 1.5 लाख से अधिक मामले
बता दें कि मुंह के कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं। हर साल करीब 1.5 लाख से अधिक नए मामले सामने आते हैं। इनमें 70 फीसदी मामले पुरुषों में देखे जाते हैं। मुंह के कैंसर के लिए सबसे बड़ी वजह तंबाकू सहित अन्य का सेवन है। इसके अलावा दूसरे कारण भी हैं। ऐसे में किट की मदद से इनकी पहचान जल्द हो सकेगी। कैंसर की पहचान जल्द होने से ठीक होने की संभावना बढ़ जाएगी। कार्यक्रम के दौरान कई अन्य उत्पाद भी दिखाएं गए। जो पर्यावरण और मरीज की सुविधा के अनुकूल हैं।

दवाओं का इस्तेमाल हो कम
मेडिसिन सेंस फ्रंटियर्स साउथ एशिया की कार्यकारी निदेशक डॉ. फरहत मंटू ने कहा कि इलाज को बेहतर बनाने के साथ चिकित्सा सुविधा में सुधार की जरूरत है। इसके लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा। इस आयोजन में 200 से अधिक शोधकर्ता, शिक्षाविद और मरीजों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस सम्मेलन में कई विषयों पर चर्चा हुई। इसमें स्वास्थ्य सुधार, एंटीमाइक्रोवियरा प्रतिरोध, जलवायु संकट और स्वास्थ्य सहित अन्य विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि एशिया में हमें अनूठी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हमारी कोशिश है कि हम मिलकर वैज्ञानिक समाधान समुदायों को उनके स्वास्थ्य तंत्र में सुधार लाने में सक्षम बनाएंगे।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में देंगे नवाचार को बढ़ावा
कार्यक्रम में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और आरएमएल अस्पताल के निदेशक डॉ. अजय शुक्ला ने कहा कि हम अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से एशिया की स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं।
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देश में पनप रहे नई रोग, पुराने फिर आ रहे सामने
एंटीबायोटिक्स दवाओं के बेवजह इस्तेमाल के कारण कई ऐसे रोग जो पहले खत्म हो चुके थे वह फिर से सामने आ रहे हैं। इसके अलावा ऐसे रोग को कुछ क्षेत्र में पाए जाते थे वह अब दूसरे जगहों पर भी जा रहे हैं। ऐसे में एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल सहित दूसरी दवाओं को लेकर विशेष सावधानी बरती होगी। इस सम्मेलन में चिकित्सा में सुधार के साथ दवाओं के इस्तेमाल को लेकर भी चर्चा हुई।
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