गंभीर हालत में मरीज को अस्पताल लाया गया, जहां इमरजेंसी टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया। त्वचा रोग विशेषज्ञों ने बीमारी की पुष्टि के बाद हाई डोज स्टेरॉयड थेरेपी दी। आंखों को बचाने के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञों ने एडवांस अम्नियोटिक मेम्ब्रेन ग्राफ्ट प्रक्रिया की। संक्रमण के खतरे को देखते हुए मरीज को सख्त निगरानी में रखा गया और ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स दी गई।
जांच में यूरिन इंफेक्शन भी पाया गया था। सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विक्रमजीत सिंह ने बताया कि टॉक्सिक एपिडर्मल नेक्रोलाइसिस दवाओं से होने वाली सबसे गंभीर प्रतिक्रियाओं में से एक है। अस्पताल में 20 दिनों तक मरीज का इलाज चला। डॉक्टरों ने बताया कि टीईएन में सेप्सिस, निमोनिया और कई अंग फेल होने का खतरा रहता है, लेकिन समय पर इलाज से मरीज की जान बच गई।