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Greater Noida: नर्सरी की छात्रा से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद, डीपीएस सोसाइटी को देना होगा 10 लाख हर्जाना

Wed, 13 Aug 2025 03:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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दिल्ली पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा में करीब 7 साल पहले साढ़े तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में स्विमिंग पूल के कर्मचारी (लाइफगार्ड) को आजीवन कारावास की सजा हुई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश-2 (पॉक्सो अधिनियम) की अदालत ने पश्चिम बंगाल निवासी चंडीदास पर 24 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 

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कोर्ट ने कहा है कि लापरवाही के लिए स्कूल का संचालन करने वाली डीपीएस सोसाइटी 10 लाख रुपये का हर्जाना पीड़िता और उसके परिवार को देगी। एक महीने में इसका भुुगतान जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के माध्यम से करना होगा।

आदेश के मुताबिक, 12 जुलाई 2018 को ग्रेटर नोएडा के गामा-2 स्थित डीपीएस में नर्सरी की छात्रा को स्वीमिंग सिखाने के दौरान पूल के लाइफ गार्ड चंडीदास ने घिनौनी हरकत की थी। जब बच्ची स्कूल से घर लौटी तो उसने अपनी मां से दर्द की शिकायत की थी। परिजनों ने अस्पताल में बच्ची की मेडिको लीगल जांच कराई थी। इसके बाद बच्ची के पिता ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 
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स्कूल प्रबंधन ने पहले घटना को नाकारा लेकिन पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज आदि के आधार पर जांच कर आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। करीब सात साल तक चले मुकदमे में कुल 12 लोगों की गवाही हुई। अदालत ने चंडीदास को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-376 ए,बी, पॉक्सो अधिनियम की धारा 5 (म)/6 एवं 9 (1)/10 के तहत दोषी करार दिया। जुर्माना नहीं भरने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

 ...तो गलत संदेश जाएगा
विशेष लोक अभियोजक ने निजी वकील की सहायता से न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि स्कूल परिसर में बच्ची पर यौन हमला किया गया। इस मामले में नरमी बरती गई तो समाज को गलत संदेश जाएगा। माता-पिता अपने बच्चों को विश्वास के साथ स्कूल की देखभाल में भेजते हैं। जहां बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना स्कूल की जिम्मेदारी है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना मानवीय मनोवैज्ञानिक कमजोरी के कारण हुई है। इसलिए उन्होंने दया की भीख मांगी। 

महिला जांच अधिकारियों को जारी होगा समन
न्यायालय ने इस मामले में पुलिस की जांच अधिकारी सीता सिंह और रश्मि चौधरी को अपराध में सह-आरोपी के रूप में अभियोग में शामिल किया है। अदालत ने जांच अधिकारी सीता सिंह और रश्मि चौधरी को इस मामले में सह-आरोपी के रूप में मुकदमा चलाने के लिए समन जारी करने को कहा है। अदालत ने कहा कि इस आदेश की एक प्रति डीजीपी उत्तर प्रदेश को सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाए।

इस निर्णय की फाइल को संग्रहीत किया जाए और सह-आरोपियों के मुकदमे के लिए उसी केस क्राइम नंबर के तहत एक नई फाइल खोली जाए, जिसमें अगली तारीख 8 सितंबर 2025 को आरोप तय किए जाएंगे। अदालत ने कहा कि इस मामले में बाद की जांच अधिकारी (आईओ) सीता सिंह और रश्मि चौधरी ने तत्कालीन प्रधानाचार्य (रेणु चतुर्वेदी) और कक्षा शिक्षिका (हीना लोहानी) के खिलाफ दायर की गई समापन रिपोर्ट रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के विपरीत है।

उन्होंने दोषपूर्ण और पक्षपातपूर्ण जांच करके तत्कालीन प्रधानाचार्य (रेणु चतुर्वेदी) और कक्षा शिक्षिका (हीना लोहानी) को बचाने का प्रयास किया, जबकि उन्हें सह-आरोपी घोषित किया जा चुका था। इस मामले में कार्यवाही नए सिरे से शुरू होगी और गवाहों को फिर से सुना जाएगा।

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