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समलैंगिकताः कौन है 19 साल का आईआईटी दिल्ली का छात्र वरुण, जो धारा 377 के खिलाफ गया सुप्रीम कोर्ट

Thu, 06 Sep 2018 01:51 PM IST
बीबीसी हिंदी
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lgbtq celebration - फोटो : पीटीआई
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"जब मुझे लगा कि मैं गे हूं तो मैं ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा। हां, धीरे-धीरे सुबककर नहीं, मैं ज़ोर-ज़ोर से रो रहा था। किसी बच्चे की तरह। उस वक़्त मेरी उम्र लगभग 15 साल थी।"

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"मैं बहुत डर गया था। मां-बाप का इकलौता बेटा। हमेशा लाड़-प्यार में पला। मैंने सोचा, अगर वो मुझे नहीं समझेंगे तो मैं क्या करूंगा? उन्होंने मुझे ऐसे नहीं अपनाया तो मैं क्या करूंगा?"

"मैं बहुत पूजा-पाठ करने वाला बंदा था। रोज़ मंदिर जाता था, रोज़ भगवान के सामने प्रार्थना करता था। बचपन में मैं सिर्फ़ दो काम करता था, पूजा और पढ़ाई। अचानक सबकुछ झूठ लगने लगा।"
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"देश में दलितों के साथ ग़लत होता है, क़ानून उनके साथ खड़ा है। मुसलमानों के साथ गलत होता है, उनकी हिफाजत के लिए भी कानून है। लेकिन हमारा क्या? समाज छोड़िए, हमें तो कानून ही अपराधी मानता है!"


19 साल के वरुण जब एक-एक करके अपनी ज़िंदगी की तहें उधेड़ने वाले किस्से सुनाने लगते हैं तो समझ नहीं आता कि कैसे रिऐक्ट करें। वो जब बोलते हैं तो शब्द ऐसे छूटते हैं मानो धड़ाधड़ चलती गोलियां रुकने का नाम न ले रही हों। वो लगातार गुस्से में ही नहीं बोलते, बीच-बीच में कुछ मजेदार बातें कहकर हंसते भी हैं। वरुण किशोर आईआईटी दिल्ली के छात्र हैं और भारत में चल रही एक बेहद अहम बहस का हिस्सा बन चुके हैं। ये बहस है, आईपीसी की धारा-377 के बारे में।

आईपीसी की इस धारा के तहत दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बनाए गए समलैंगिक सम्बन्धों को अपराध माना जाता था। इसके लिए सजा का प्रावधान भी था और उम्रकैद तक हो सकती थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले के बाद समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं है। आज भारत में एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल और ट्रांसजेंडर) समुदाय और उनके समर्थक धारा-377 के खिलाफ जोर-शोर से मोर्चा खोले हुए हैं।

सबसे कम उम्र के हैं वरुण

lgbtq celebration - फोटो : एएनआई
इसी मोर्चे को थामने वालों में अब आईआईटी के 20 छात्रों का नाम भी जुड़ गया है और इनमें से सबसे युवा नाम है वरुण किशोर। वरुण इन बीसों में सबसे कम उम्र के हैं। याचिका दायर करने वालों में कोई आईआईटी दिल्ली का है तो कोई आईआईटी मुंबई का और कोई आईआईटी खड़गपुर का। कोई अभी आईआईटी में पढ़ रहा है तो कोई बरसों पहले यहां से पढ़ाई कर चुका है। इनमें दो महिलाएं और एक ट्रांसवुमन भी शामिल हैं। इन सबने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में धारा-377 के खिलाफ एक याचिका दायर की थी।

रोज-रोज अपमान और भेदभाव
अपनी याचिका में इन्होंने बताया है कि कैसे समलैंगिकता को अपराध ठहराए जाने की वजह से इन्हें हर रोज अपमान और भेदभाव झेलना पड़ता है। इन्होंने अदालत को निजी जिंदगी के किस्से लिखकर भेजे थे और धारा-377 को खत्म करने की अपील की थी और सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर उससे जवाब मांगा है।

वरुण ने भी अदालत को वो सब कुछ बताया है जो उन्होंने बीबीसी से बातचीत में बताया। वो तमिलनाडु के एक पढ़े-लिखे मिडिल क्लास परिवार से हैं। खुद को 'नर्ड' (कुशाग्र) कहने वाले वरुण सातवीं क्लास से ही आईआईटी की तैयारी करने लगे थे।

11वीं क्लास में पता चला...

lgbtq celebration - फोटो : बीबीसी
वरुण कहते हैं, "तमिलनाडु में पढ़ाई पर बहुत जोर दिया जाता था। खासकर इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई पर। मेरा बचपन और टीनएज भी कोचिंग और स्कूल की आपाधापी में बीता।" वरुण को अपनी सेक्शुअलिटी का एहसास 11वीं क्लास में हुआ। उन्होंने बताया, "इससे पहले मैं पढ़ाई में ही उलझा रहा और जैसा कि आप जानते हैं, भारत में सेक्स एजुकेशन नाम की कोई चिड़िया है ही नहीं, मुझे भी इन सबके बारे में कुछ मालूम नहीं था।"

'मैं माधवन का दीवाना था'
हालांकि धीरे-धीरे वरुण को एहसास होने लगा था कि वो अपने क्लास के ज़्यादातर लड़कों से अलग हैं. उनके दोस्तों को लड़कियां अच्छी लगती थीं और वो माधवन के दीवाने थे। वरुण ने बताया, "मुझे लड़कियां या उनकी वो बातें आकर्षित नहीं करती थीं जो मेरे दोस्तों को। बहुत कंफ्यूजन था। धीरे-धीरे मैंने इंटरनेट पर पढ़ना शुरू किया और चीजें समझ में आने लगीं। कुछ इस तरह मुझे पता चला कि मैं गे हूं।"

वरुण को अपने गे होने का पता 'सबसे बुरे' वक्त में लगा। ये वो वक्त था जब दिसंबर 2013 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए समलैंगिकता को दोबारा अपराध घोषित कर दिया था। वरुण को इसके ठीक एक महीने पहले अपने बारे में पता चला था।

'ओह गॉड! मैं क्रिमिनल हूं'

lgbtq celebration - फोटो : एएनआई
अभी वो खुद ही परेशान थे कि अखबारों की सुर्खियां और टीवी पर फ़्लैश होने वाली ब्रेकिंग न्यूज चीख-चीखकर ये बताने लगीं कि भारत में समलैंगिकता को फिर से अपराध करार दे दिया गया है। वो बताते हैं, "इन सबने मुझे और डरा दिया। मुझे लगा, ओह गॉड! मैं क्रिमिनल हूं। किसी को पता चल गया तो मुझे जेल में डाल दिया जाएगा। मेरा परिवार मुझे छोड़ देगा...ऐसे न जाने कितने ख्याल मेरे मन में आते थे।"

राहत वाली बात ये रही कि जब वरुण ने अपने पिता को इस बारे में बताया तो उन्होंने उनका माथा चूमा और कहा कि वो हमेशा उनके साथ हैं। हालांकि उनकी मां के लिए ये सब स्वीकार करना आसान नहीं था। उन्हें अब भी लगता है कि ये एक दौर है जो गुजर जाएगा। वैसे वरुण ख़ुद को खुशकिस्मत मानते हैं क्योंकि उनके करीबियों ने हमेशा उनका साथ दिया।

'सॉरी यार! गे के साथ नहीं रह सकता'
लेकिन ऐसा भी नहीं है कि उन्हें भेदभाव झेलना ही नहीं पड़ा। आईआईटी के हॉस्टल में उनके रूममेट को जब पता चला कि वो समलैंगिक हैं तो उन्होंने उनके साथ रहने से साफ इनकार कर दिया। "सॉरी यार! मैं एक गे के साथ कमरा शेयर नहीं कर सकता'' - वरुण को अपने पुराने रूममेट की ये बात आज भी याद है।

उनके मुताबिक आईआईटी जैसी जगह में भी तकरीबन 80 फीसदी लोगों की सोच रूढ़िवादी है। वो कहते हैं, "बेशक, यहां सभी लोग मैथ्स और साइंस में बहुत अच्छे हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो संवेदनशील भी हैं।"
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सरकार से क्या चाहते हैं?

LGBT
वरुण क्या चाहते हैं, ये उन्हें अच्छी तरह मालूम है। वो चाहते हैं कि सरकार एलजीबीटी समुदाय के लोगों को दोयम दर्जे का नागरिक मानना बंद करे। वो कहते हैं, "लोगों को लगता है कि हमें सिर्फ सेक्स चाहिए। वो सीधे कहते हैं कि कमरे के अंदर चाहे जिसके साथ सेक्स करो, कौन रोकने-टोकने आएगा? ऐसा बिल्कुल नहीं है। ये सिर्फ सेक्स के बारे में नहीं है।"

वरुण का मानना है कि एलजीबीटी समाज को स्वीकार्यता और इज्जत की जरूरत है। वैसी ही स्वीकार्यता और इज्जत जो बाकी सबको हासिल है। उन्होंने कहा, "हम भी खुलकर प्यार करना चाहते हैं, शादी करना चाहते हैं और घर बसाना चाहते हैं। हमें ये हक क्यों नहीं मिलना चाहिए?"
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