उपराज्यपाल के सामने एविएशन अधिकारियों ने आईजीआई एयरपोर्ट के संचालन, विस्तार और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट पेश की। एलजी ने इसे बारीकी से समझा और कहा कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तकनीकी रूप से उन्नत एविएशन सेक्टर के विजन के अनुरूप काम हो रहा है। उन्होंने चल रहे काम की सराहना की।
जीरो वेस्ट टू लैंडफिल नीति को सराहा
उपराज्यपाल ने दिल्ली एयरपोर्ट द्वारा अपनाई गई ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ नीति और जल संचयन (वाटर हार्वेस्टिंग) प्रणाली को सतत विकास के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहलें न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती हैं, बल्कि देश में टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर के नए मानक भी स्थापित करती हैं।
एयरपोर्ट और एयरोसिटी बने निवेश का केंद्र
एलजी ने सुझाव दिया कि विश्वस्तरीय एयरपोर्ट और एयरोसिटी इकोसिस्टम का प्रभावी उपयोग कर दिल्ली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार, पर्यटन और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है। उन्होंने संबंधित एजेंसियों से इस दिशा में ठोस रणनीति तैयार करने के लिए कहा, ताकि राजधानी की वैश्विक पहचान और मजबूत हो सके।
एयर क्राफ्ट से ध्वनि प्रदूषण को बताया गंभीर
तेजी से हो रहे विकास के बीच संधू ने एयरक्राफ्ट शोर प्रदूषण के मुद्दे को भी गंभीरता से उठाया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास और स्थानीय निवासियों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए प्रभावी समाधान तलाशे जाएं। उपराज्यपाल ने दोहराया कि दिल्ली को एक ऐसा एविएशन हब बनाया जाएगा, जो वैश्विक स्तर पर व्यापार और निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का भी पूरी तरह पालन करेगा।