पिछले साल मई में मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से गिरफ्तारी के बाद से भाजपा लगातार सत्येंद्र जैन के इस्तीफा देने की मांग कर रही थी। उत्पाद शुल्क में नाम आने के बाद सिसोदिया को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। अगस्त 2022 में आबकारी नीति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में रविवार को सीबीआई ने सिसोदिया को गिरफ्तार किया। हालांकि शराब नीति को रद्द कर, 2021-22 की नीति को लागू किया गया।
इस्तीफे की तारीख पर भी उठे सवाल
सिसोदिया-जैन के इस्तीफे में कमियां पर भी उपराज्यपाल ने सवाल उठाए हैं। मनीष सिसोदिया के त्याग पत्र पर तारीख नहीं है जबकि सत्येंद्र जैन ने 27 फरवरी को ही इस्तीफा दे दिया। दोनों इस्तीफे 28 तारीख को एलजी के पास स्वीकृति के लिए भेजे गए थे। सूत्रों के मुताबिक, अपने आकलन में उपराज्यपाल ने लिखा है कि गिरफ्तारी के बाद सिसोदिया कैसे बगैर तारीख वाला पत्र टाइप करके लिख सकते हैं। क्या सीबीआई की पूछताछ और गिरफ्तारी से पहले ही उन्होंने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। क्या जैन का सादा और हस्तलिखित इस्तीफा उसके बाद लिया गया। अगर सिसोदिया ने पहले और जैन ने 27 फरवरी को इस्तीफा दिया तो इसकी घोषणा 28 की शाम क्यों की गई। क्या सिसोदिया और जैन से छुटकारा पाने के लिए अरविंद केजरीवाल ने ऐसा खेल खेला।