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दिल्ली के अतिथि शिक्षकों के सपनों पर लगा ग्रहण, एलजी ने सीएम को लिखा पत्र

Wed, 04 Oct 2017 03:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, बिल की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुये दुबारा विचार की गुजारिश की 
दिल्ली सरकार के बिल का उपराज्यपाल की नजर टेढ़ी  
- मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, बिल की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुये दुबारा विचार की गुजारिश की            
- दिल्ली सरकार पेश करेगी बिल, विधान सभा से पास होने पर मंजूरी के लिये उपराज्यपाल को भेजा जायेगा             
- भाजपा के विरोध के चलते रहेगा हंगामेदार सत्र
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- फोटो : PTI
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विस्तार
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अतिथि शिक्षकों को नियमित करने की दिल्ली सरकार की योजना पर नये सिरे से विवाद खड़ा हो गया है। उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली सरकार की तरफ से इस मसले पर बुधवार को बुलाए गए विधानसभा सत्र में पेश करने के लिए तैयार विधेयक की वैधानिकता पर सवाल उठाया है।
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इस बारे में उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक पत्र लिखा है। इसमें उपराज्यपाल ने केजरीवाल को विधेयक पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है। उधर, दिल्ली सरकार का कहना है कि बुधवार को विधेयक विधान सभा में पेश किया जायेगा।
    
उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री से गुजारिश की है कि सर्व शिक्षा अभियान-2017 के तहत अतिथि शिक्षकों व शिक्षकों की सेवाओं को नियमित करने से संबंधित बिल को लागू करने से पहले पनुर्विचार करें।
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दिल्ली सरकार विधान सभा में पेश करेगी विधेयक

अन‌िल बैजल - फोटो : सोशल मीड‌िया
दिल्ली कैबिनेट से 27 अक्तूबर को मंजूर विधेयक में दिल्ली की विधान सभा में सर्व शिक्षा अभियान के तहत सेवाओं को नियमित किया जाना है। जबकि ट्रांजक्शन आफ बिजनेस आफ द गर्वमेंट आफ एनसीटी आफ दिल्ली रूल्स, 1993 के तहत विधेयक पर कानून विभाग की सलाह जरूरी  है। जबकि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है।

उपराज्यपाल ने आगे कहा है कि यह विधेयक सीधे तौर पर सेवाओं से जुड़ा है। ऐसे में गृह मंत्रालय की अप्रैल 2015 की अधिसूचना और हाईकोर्ट के अगस्त 2016 के फैसले में साफ है कि सेवाओं से जुड़े मामले दिल्ली की विधान सभा की विधायी क्षमता से बाहर हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री से उपराज्यपाल ने गुजारिश की है कि विधेयक पेश करने से पहले मंत्रिमंडल के फैसले पर पुनर्विचार करें।

उपराज्यपाल अनिल बैजल की तरफ से बिल पर उठाए गए सवाल के बाद भी सरकार विधानसभा में बिल लाने जा रही है। सरकार का कहना है कि कैबिनेट ने इस मसले पर विचार किया है। विधेयक विधान सभा में पेश किया जायेगा।
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हंगामेदार रहेगा सत्र

वहीं, विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल बताते हैं कि सत्र बुलाने का निर्णय पहले लिया गया था। पूर्व में लिए गए फैसले के अनुसार सदन में बिल पेश किया जाएगा। हमेशा की तरह यह बिल भी उपराज्यपाल के पास भेजा जाएगा।

अगर उन्हें कोई आपत्ति है तो जो हश्र अन्य बिलों का किया है वह फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं। गोयल के मुताबिक, बुधवार के सत्र के लिये अभी तक सरकार से एक ही एजेंडा मिला है।

उपराज्यपाल द्वारा बिल को असंवैधानिक बताने के बाद सत्र हंगामेदार रहेगा। भाजपा ने भी इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार को घेरने का पूरी तैयारी कर ली है। भाजपा के समक्ष हालांकि पहले गैस्ट टीचरों को नियमित करने के मुद्दे पर नीति तय करने में पेरशानी आ रही थी।

भाजपा का मानना था कि बिल के विरोध पर गेस्ट टीचरों के विरोध का सामना करना पड़ेगा, लेकिन अब उपराज्यपाल के पत्र के बाद तय है कि भाजपा जोर-शौर से इसका विरोध करेगी और हंगाता तय है।
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