शहर की कुल जनसंख्या में महिलाओं की करीब आधी आबादी है, लेकिन इसकी सुरक्षा के लिए पुलिस का सुरक्षा तंत्र अधूरा है। पुलिस चप्पे-चप्पे पर महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के दावे तो करती है, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है।
महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बहुत कम होने के कारण हर जगह महिलाओं की सुरक्षा के लिए उनकी तैनाती नहीं हो पाती। कोई बड़ी वारदात हो जाए तभी महिला पुलिसकर्मी वहां पहुंचती हैं। अधिकांश जगहों पर पुरुष सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी ही नजर आती है।
जिले में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या नाममात्र की है। महिलाओं की आबादी के हिसाब से उनकी संख्या नहीं है। जिले में कुल पुलिसकर्मियों की संख्या में पुरुषों के मुकाबले लगभग छह प्रतिशत ही महिला पुलिसकर्मी हैं।
ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए इतनी कम महिला पुलिसकर्मी कैसे हर जगह तैनात हो सकती हैं।
कई मामलों में देखा गया है कि मौके पर हंगामा व लड़ाई-झगड़ा करने वालों में महिलाएं भी शामिल होती हैं, लेकिन जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंचती हैं तो वहां महिलाकर्मी नहीं होती, ऐसे में विशेष रूप से महिलाओं को काबू करने के लिए बाद में महिला कर्मियों को बुलाया जाता है।
महिला सुरक्षा के नाम पर इतना बड़ा खिलवाड़
सिर्फ तीन महिला पीसीआर
जिले में थानों की संख्या के मुकाबले महिला पीसीआर की संख्या भी कम है। यहां 18 थाने और उनके अंतर्गत 38 पुलिस चौकियां हैं। जिले में तीन जोन सेंट्रल, एनआईटी और बल्लभगढ़ के तहत तीन पीसीआर ही हैं। एक जोन में कई-कई थाने और चौकियां हैं, ऐसे में एक महिला पीसीआर कैसे सभी थानाक्षेत्रों में नजर रख सकती है।
सेंट्रल जोन : थाने-5, एनआइटी जोन : 7, बल्लभगढ़ जोन : 5, ट्रैफिक थाना-1
महिला चालक भी नहीं
महिला पीसीआर में पुलिस के पास तैनात करने के लिए महिला चालक भी नहीं हैं। तीनों पीसीआर को पुरुष चालक ही चलाते हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुछ समय पहले 2 महिला कर्मियों को चालक की ट्रेनिंग दी गई थी, लेकिन अब उनका कहीं और तबादला हो गया है।
जनवरी से अगस्त तक महिलाओं के खिलाफ अपराध का आंकड़ा
स्नैचिंग-69
दुष्कर्म-68
दहेज प्रताड़ना-179
छेड़छाड़-64
पिछले वर्ष (इस अवधि में) के मुकाबले इस साल दुष्कर्म के मामलों में 55 फीसदी वृद्धि हुई है, जबकि छेड़छाड़ के मामले 7 फीसदी बढ़े हैं।
(स्रोत: फरीदाबाद पुलिस)
'महिला पुलिसकर्मियों का आत्मविश्वास बढ़ाना होगा'
कुल जनसंख्या
17,98,954
पुरुष
9,61532
महिला
8,37,422
कुल पुलिसकर्मी
3,100
इनमें सिर्फ 191 महिला पुलिसकर्मी
न सिर्फ महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़े, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी ऊंचा किया जाए, क्योंकि देखा यह गया है कि जो नई-नई लड़कियां पुलिस में आ रही हैं उनमें अभी वर्दी का रौब नहीं आया है, इसलिए उनसे अपराधी डरते नहीं हैं।
-रश्मि सिंह, महिला मुद्दों की लेखिका
महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पूरे प्रदेश में 334 और महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके अलावा 100 महिला सब-इंस्पेक्टरों की मांग सरकार से की गई है।
-एसएन वशिष्ठ, पुलिस महानिदेशक, हरियाणा