बॉयोडावर्सिटी पार्क में दिखा तेंदुआ, वैज्ञानिकों ने कहा फायदेमंद है ये लक्षण
Wed, 23 Nov 2016 11:52 AM IST
संतोष कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
सार
विशेषज्ञों की राय, तेंदुआ के आने से पार्क की खाद्य श्रृंखला पूरी, पूरी तरह वन क्षेत्र बन गया पार्क, घबराने की जगह इसे फायदेमंद मानें दिल्लीवासी
यमुना बॉयोडावर्सिटी पार्क में दिखा तेंदुआ
- विशेषज्ञों की राय, तेंदुआ के आने से पार्क की खाद्य श्रृंखला पूरी
- पूरी तरह वन क्षेत्र बन गया पार्क, घबराने की जगह इसे फायदेमंद मानें दिल्लीवासी
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वजीराबाद स्थित बॉयोडावर्सिटी पार्क में तेंदुआ दिखा है। इसके आधार पर मानव निर्मित एक पार्क के पूरी तरह से वन क्षेत्र में तब्दील होने की उम्मीद बनी है। इसके आने से पार्क की खाद्य श्रृंखला पूरी हो गयी है।
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वैज्ञानिक इसे दिल्ली की पारिस्थितिकी के लिये फायदेमंद मान रहे हैं। उनकी मानें तो बॉयोडावर्सिटी पार्क देश के लिये एक मॉडल के तौर पर उभरा है। इस मॉडल के आधार पर देश भर के वनों का पुनर्विकास किया जा सकता है।
वजीराबाद इलाके में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने बॉयोडावर्सिटी पार्क का विकास किया है। 457 एकड़ में फैले इस पार्क के दो हिस्से हैं। इसके 300 एकड़ के पहले हिस्से में यमुना नदी की बाढ़ का पानी आता है। जबकि 157 एकड़ का दूसरा हिस्सा सूखा रहता है।
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दोनों एक इकोलॉजिकल कॉरीडोर से जुड़े हैं। पिछले करीब दो हफ्तों से पार्क में तेंदुआ आने के संकेत मिल रहे थे। पार्क के वैज्ञानिक इसे लगातार मॉनीटर कर रहे थे। पैर के निशान के सहारे उन्होंने तेंदुए तक पहुंचने की कोशिश की।
यमुना बॉयोडावर्सिटी केवैज्ञानिक इंचार्ज फैय्याज खुदसर बताते हैं कि पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद सोमवार देर रात एक टीम इसकी खोज में निकली। थोड़ी दूर जाने पर तेंदुआ एक पेड़ के नीचे बैठा दिख गया।
हमें देखकर उसने थोड़ी उछल-कूद की। करीब एक घंटे तक निगरानी करने के बाद हम वापस लौट आये। इसकी हरकतें व फूले पेट को देखने से साफ लगा कि पार्क में पर्याप्त भोजन मिल रहा है।
वैज्ञानिक तेंदुये को पार्क के लिये मान रहे फायदेमंद
बायोडायवर्सिटी पार्क में तेंदुआ
- फोटो : अमर उजाला
यमुना बॉयोडावर्सिटी पार्क से जुड़े वैज्ञानिक बताते हैं कि किसी भी वन क्षेत्र के लिये जरूरी है कि वहां की खाद्य श्रृखंला पूरी हो। शाकाहारी और मांसाहारी पशु-पक्षियों के अलावा वहां सर्वभक्षी जानवर भी होने चाहिये। अभी तक पार्क की खाद्य श्रृंखला पूरी नहीं हुई थी। लेकिन तेंदुये के आने से यह कमी पूरी हो गयी है।
फैय्याज खुदसर बताते हैं कि पार्क में खाद्य श्रृंखला की सारी प्रक्रियाओं को मूर्त में लाकर यमुना नदी के स्थानीय वन समुदायों व घास के मैदानों के पुनर्विकास का काम पूरा कर लिया गया है। फैय्याज खुदसर की मानें तो दस साल पहले ही प्रसिद्व वैज्ञानिक प्रो. सीआर बाबू ने तेंदुयें के आने की भविष्यवाणी कर रखी है।
तेंदुयें के आने के है दिल्ली के खास मायने
वैज्ञानिकों की मानें तो तेंदुआ पहले दिल्ली में पाया जाता था लेकिन शहरीकरण की तेज रफ्तार से यह यहां से गायब हो गये। अब दुबारा इसका लौटना और दो हफ्ते तक टिके रहना यह बताता है कि पार्क का पर्यावरण उसके माकूल साबित हो रहा है। वहीं, पार्क भी क्रियात्मक पारिस्थितिकी तंत्र के तौर पर काम करने लगा है।
हरियाणा के कलेसर नेशनल पार्क से दिल्ली पहुंचा
पार्क के वैज्ञानिक बताते हैं कि जंगली जानवर नदियों को इस्तेमाल अपनी आवाजाही के तौर पर करते हैं। दिल्ली से करीब 200 किमी दूर स्थित हरियाणा के कलेसर नेशनल पार्क से इसके दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। वैज्ञानिक बताते हैं कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है।