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अरावली पर्वत के तेंदुए का नहीं है कोई हिसाब

Tue, 25 Feb 2014 03:47 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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अरावली पर्वत पर कभी तेंदुओं की भरमार थी। लेकिन अब यहां तेंदुए नहीं दिखाई दे रहे हैं। वाइल्ड लाइफ विभाग को भी यहां बचे हुए तेंदुए का अंदाजा नहीं है।
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ऐसे में रविवार को एक तेंदुए के मेरठ शहर में घुसकर लोगों अफरातफरी मचाने के बाद वाइल्ड लाइफ फिर से सक्रिय हो गया है। तेंदुए के आतंक से अब भी मेरठ उबर नहीं पाया है। पूरे शहर में दहशत और अफरातफरी का आलम बना हुआ है।

पढ़ें: गाजियाबाद में भी दिखा तेंदुए का खौफ

वहीं मेवात में यदा-कदा दिखने वाले तेंदुओं की गिनती कराने की योजना बन रही है। गुड़गांव के डीएफओ वाइल्ड लाइफ कुलविंदर सिंह ने बताया उन्हें तेंदुओं की संख्या का पता नहीं है।
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हालांकि, कुछ महीने पहले यह जानने का प्रयास किया गया था। पता लगाने की जिम्मेदारी वार्डन वाइल्ड लाइफ चंडीगढ़ को सौंपी गई थी। उनकी रिपोर्ट भी आई। बाद में उसे वापस कर दी गई।

उसमें कोई तकनीकी खामी थी। अब नए सिरे से रिपोर्ट आएगी। पुरानी रिपोर्ट में क्या बात थी, इसकी जानकारी उन्होंने नहीं दी।

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उधर मुरादाबाद बाद से लेकर उत्तराखंड तक आदमखोर बाघिन का आतंक भी अभी थमा नहीं है। ऐसे में किसी भी पर्वत पर बिना हिसाब-किताब के जंगली जानवर दहशत का कारण बन सकते हैं।
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12 वर्ष पहले हुई थी गणना
गुड़गांव में तेंदुओं की गणना वर्ष 2002 में हुई थी। तब इसकी संख्या 12 थी। गणना कराने का काम तत्कालीन कंजरवेटर आरपी बलवान ने कराया था। उन्होंने बताया कि उस समय तेंदुओं का ठिकाना मानेसर, दमदमा, रायसीना और भोंडसी था।

अब वह हैं या नहीं किसी को नहीं पता। तकरीबन डेढ़ वर्ष पहले सोहना में आबादी वाले क्षेत्र से एक तेंदुए को पकड़ा गया था।
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