कथित भ्रष्टाचार के आरोप में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को जबरन सेवानिवृति देने पर राजधानी के वकीलों ने नाराजगी जताई है।
उनका तर्क है कि जिला अदालतों में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ऐसे मामलों में लिप्त जजों के खिलाफ कानून के तहत मुकदमा चलाकर दंडित किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने उक्त जज के खिलाफ की गई जांच को सार्वजनिक करने व जजों की भर्ती यूपीएससी के जरिए करने की मांग की है।
सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशन की समन्वय कमेटी की बैठक में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को सेवा से जबरन रिटायरमेंट देने पर नाराजगी जताई। सभी सदस्यों ने कहा कि भ्रष्टाचार से निपटने का यह कोई हल नहीं है।
हाईकोर्ट ने जब उन्हें दोषी पाया है तो आम लोगों के समान ही उक्त जज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए, इससे आम लोगों में न्यायपालिका में विश्वास बढ़ेगा।