याची का कहना है कि शशि थरूर की अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई योग्य नहीं थी क्योंकि यह कानून के मुताबिक नहीं थी। इसके लिये अलावा यह याचिका सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन थी। यह जमानत याचिका कानून का चकमा देने के लिये दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुये याचिका में कहा गया है कि अग्रिम जमानत याचिका केवल जांच के दौरान ही दायर की जा सकती है लेकिन अदालती समन जारी होने के बाद दायर नहीं की जा सकती।
दिल्ली पुलिस ने 14 मई 2018 को थरूर के खिलाफ दहेज हत्या व खुदकुशी के लिये उकसाने की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने इस चार्जशीट पर पांच जून को संज्ञान लेने के बाद थरूर को बतौर आरोपी समन जारी किया था। अदालत ने थरूर को सात जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया था लेकिन इससे पहले थरूर ने अग्रिम जमानत ले ली थी।
गौरतलब है कि सुनंदा पुष्कर की 17 जनवरी 2014 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। उनका शव एक पांच सितारा होटल के कमरे से बरामद हुआ था।