जेएनयू देशद्रोह मामले में अब नया मोड़ आ गया है। दिल्ली के कानून मंत्री ने विभागीय सचिव को कारण बताओ नोटिस भेजा है। मंत्री ने अपने सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है कि बगैर उनकी जानकारी में लाए चार्जशीट से जुड़ी फाइल गृह विभाग को कैसे भेज दी गई। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मसले पर ट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री पर हमला बोला है।
कैलाश गहलोत ने नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि उनकी मंजूरी के बगैर कोई भी फैसला नहीं लिया जा सकता। विभागीय स्तर पर कोई भी राय किसी अन्य विभाग को सीधे नहीं भेजी जा सकती है। गहलोत ने कहा है कि सीधे प्रधान सचिव (गृह) को फाइल भेजना न केवल वरिष्ठता का उल्लंघन है, बल्कि ऐसा जान पड़ता है कि यह जानबूझकर किया गया, ताकि कानून मंत्री के विचार फाइल पर रिकॉर्ड न हो पाएं।
दूसरी तरफ दिल्ली सरकार के अधिकारी बता रहे हैं कि संबंधित फाइल अभी गृह मंत्री सत्येंद्र जैन के पास है। सरकार के पास इस पर फैसला करने के लिए तीन महीने का समय है। इस बीच सरकार फाइल पर अपनी राय स्पष्ट कर देगी। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली सरकार से जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे कन्हैया कुमार समेत दूसरे छात्रों के खिलाफ 2016 के मामले में चार्जशीट फाइल की है। आरोप था कि छात्रों ने जेएनयू कैंपस में राष्ट्र विरोधी नारे लगाए थे।
मुझे नहीं पता कि कन्हैया ने देशद्रोह किया है या नहीं, इसकी जांच कानून विभाग कर रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री ने दिल्ली के बच्चों के स्कूल रोके, अस्पताल रोके, सीसीटीवी कैमरे रोके, मोहल्ला क्लीनिक रोके और दिल्ली को ठप करने की पूरी कोशिश की, क्या यह देशद्रोह नहीं है।
-अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री