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लांसनायक वानी का अशोक चक्र लेते समय रो पड़ी पत्नी, मौत की खबर पर नहीं निकले थे आंसू

Sat, 26 Jan 2019 02:52 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सम्मान लेतीं शहीद वानी की पत्नी - फोटो : PTI
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देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर करने वाले शहीद लांस नायक नजीर अहमद वानी को मरणोपरांत गणतंत्र दिवस के मौके पर अशोक चक्र (वीरता सम्मान) से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनकी पत्नी और मां को सौंपा गया है।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जैसे ही नजीर अहमद वानी के परिजनों को बुला कर अशोक चक्र से सम्मानित किया वैसे ही उनकी आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगी। ज्ञात हो कि शोपियां में डेढ़ महीने पहले आतंकवाद विरोधी अभियान वानी शहीद हो गए थे। यह वीरता पुरस्कार दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकवाद निरोधक अभियान के लिए मिला है, जिसमें लश्कर और हिजबुल मुजाहिदीन के छह आतंकी मारे गए थे।

वानी दो बार सेना मेडल भी जीत चुके हैं। इस सम्मान पर उनके परिजनों ने भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया। लांस नायक वानी की पत्नी ने कहा था कि उनके शहीद हो जाने की खबर सुनने के बाद मेरी आंख से एक भी आंसू नहीं निकला। कोई अंदरूनी संकल्प था जिसने मेरे आंसुओं को नहीं निकलने दिया। मेहजबीन पेशे से शिक्षक और दो बच्चों की मां है। मेहजबीन ने कहा था कि नाजिर का प्यार एवं निडर व्यक्तित्व, युवाओं को अच्छा नागरिक बनने की दिशा में प्रोत्साहित करने का प्रेरणास्रोत है। 
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जानिए कौन है लांस नायक नजीर अहमद वानी
दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले के अश्मूजी गांव के नजीर एक समय खुद आतंकवादी थे। बाद में उन्हें गलती का अहसास हुआ और वह आतंकवाद छोड़कर 2004 में सेना में भर्ती हो गए। नजीर की तरह के लोगों को घाटी में इख्वान कहते हैं। आतंकियों के सफाया के लिए चलाए गए कई आपरेशन में शामिल हुए।

23 नवंबर 2018 को जब वानी 34 राष्ट्रीय रायफ ल्स के साथियों के साथ ड्यूटी पर थे, तब इंटेलिजेंस से शोपियां के बटागुंड गांव में हिजबुल और लश्कर के छह आतंकियों के मौजूद होने की खबर मिली। 

इनपुट थे कि आतंकियों के पास भारी मात्रा में हथियार और गोले बारूद हैं। इस एनकाउंटर में वानी और उनके साथियों ने कुल छह आतंकियों को मार गिराया था। वानी ने दो आतंकियों को मारने और अपने घायल साथी को बचाते हुए सबसे बड़ा बलिदान दिया। 

एनकाउंटर में वह बुरी तरह जख्मी हो गए थे और हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था। 26 नवंबर को अंतिम संस्कार से पहले वानी को उनके गांव में 21 तोपों की सलामी दी गई थी। वह अपने पीछे पत्नी और दो बच्चे छोड़ गए।
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