कोरोना वायरस से संक्रमित गंभीर मरीजों के लिए प्लाज्मा थेरेपी को लेकर अब तक देश के 34 चिकित्सीय संस्थानों को ट्रायल की मंजूरी मिल चुकी है। इनमें दिल्ली का लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज शामिल है।
दिल्ली एम्स की ओर से भी प्लाज्मा थेरेपी को लेकर आवेदन दिया गया था, क्योंकि एम्स के पास ट्रॉमा और झज्जर के दो कोविड केंद्र हैं। साथ ही प्लाज्मा निकालने वाली तकनीक भी है, लेकिन आवेदन में कुछ खामियां होने के चलते फिलहाल एम्स को ट्रायल की मंजूरी नहीं मिली है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 34 चिकित्सीय संस्थानों की तीसरी बार सूची जारी की है। इससे पहले 28 चिकित्सीय संस्थानों की सूची दो दिन पहले जारी की थी, लेकिन बाद में इनकी बढ़ोतरी कर दी गई।
आईसीएमआर के अनुसार, उनके पास देशभर से 113 आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन आवेदन में खामियों के चलते केवल 34 ही स्वीकार किए गए हैं। दिल्ली से कुल सात संस्थान के आवेदन पहुंचे हैं, जिनमें भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी और एम्स भी शामिल है। फिलहाल लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज को इसकी मान्यता मिली है। यहां अभी 30 से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती हैं।
आईसीएमआर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी सिर्फ अति गंभीर कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए है। भले ही कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या हजारों में हो, लेकिन 80 फीसदी मरीज बगैर लक्षण या हल्का असर वाले मिल रहे हैं।
इसलिए हर अस्पताल में अति गंभीर संक्रमित मरीज ज्यादा नहीं है। इस ट्रायल के लिए कुल 400 मरीज चाहिए। इन मरीजों का पंजीयन शुरू हो चुका है जिस दिन पंजीयन पूरा हो जाएगा, संस्थानों की संख्या को नहीं बढ़ाया जाएगा।