दिल्ली सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा पुख्ता करने की तैयारी शुरू कर दी है। वार्ड स्तर पर महिला सुरक्षा दल बनाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है।
इसे एक पखवाड़े के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करनी है जिसके आधार पर दिल्ली सरकार फोर्स का गठन करेगी। मुख्य सचिव के अलावा होम गार्ड के डायरेक्टर जनरल व महिला और बाल कल्याण विभाग के डायरेक्टर इसके सदस्य हैं।
वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कमेटी वार्ड स्तर पर गठित होगी। कमेटी इस बात पर विचार करेगी कि फोर्स में शामिल होने वाले लोगों को वैतनिक रखा गया या संविदा पर।
कमेटी को फोर्स के प्रमुख समेत सुरक्षा बलों सेवा-शर्तें, प्रशिक्षण और जिम्मेदारियों का विस्तृत खाका तैयार करना होगा। कोशिश वार्ड स्तर पर एक यूनिट तैनात करने की है।
यह भी पढ़ें: 'आप' के नहले पर कांग्रेस का दहला
इसके लिए वार्ड की जनसंख्या और इसमें महिलाओं के अनुपात का आकलन करके एक युनिट में सुरक्षाकर्मियों की संख्या की जाएगी। दिल्ली में न्यूनतम 272 सुरक्षा यूनिट जरूरी होंगे।
दिल्ली सरकार महिला सुरक्षा दल के गठन पर होने वाले खर्च का पूरा भार उठाएगी। इसके अलावा कमेटी को महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के तीन से छह महीने के भीतर निपटाने की संभावना पर भी काम करेगी।
इस समय सीमा के भीतर सभी मामलों को निपटाने के लिए कितनी फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत होगी, इसका आंकलन भी कमेटी करेगी।
दिल्ली सरकार दिवंगत न्यायाधीश जेएस वर्मा और न्यायाधीश उषा मेहरा समिति की सिफारिशों को लागू करने की कोशिश करेगी। जिससे महिला अत्याचारों से संबंधित सभी मामलों को जल्द निपटाया जा सके।