गेट के बाहर सड़क पर महिला की प्रसूति की बात अस्पताल में फैलते ही एक तरह की भगदड़ सी मच गई। डॉक्टरों से लेकर नर्सिंग स्टाफ तक हर कोई इस मामले को रफा दफा करने में जुट गया।
आनन फानन में महिला और नवजात शिशु को भर्ती कराया। साथ ही उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया। डॉक्टरों की मानें तो फिलहाल दोनों ही स्वस्थ्य हैं।
महिला को ही बताया कसूरवार
इस घटना के बाद जब अस्पताल के डॉक्टरों और प्रबंधन पर सवाल खड़े हुए तो उन्होंने महिला को ही कसूरवार ठहरा दिया। साथ ही आरोप का खंडन करते हुए कहा कि महिला उमा डॉक्टर के पास पहुंची ही नहीं थी।
जबकि वहां मौजूद तिमारदारों का कहना है कि डॉक्टरों ने उमा और उसके पति को कई बार चक्कर लगवाए थे। बाद में डॉक्टर ने पुराना रिकॉर्ड न होने की वजह से इलाज नहीं करने की बात भी कही थी।
जांच के लिए बनाई कमेटी
अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमिता सक्सेना ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिला डॉक्टर के पास नहीं पहुंची थी।
फिर भी इसकी तह तक जाने के लिए एक जांच कमेटी बनाई है। यह घटना वाकई शर्मनाक है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूर होगी।