आयोग की परीक्षा पास करके बेटे का अफसर बनने का रास्ता साफ हुआ तो पूरे घर में खुशी का माहौल बन गया। चूंकि सभी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी थी, ऐसे में दोस्त-रिश्तेदार और पड़ोसी मिठाई की फरमाइश भी करने लगे थे। नौकरी की खुशी में अरविंद के परिवार ने मिठाई भी बांट दीं, मगर उनकी यह खुशी अगले ही दिन गम में बदल गई। हाथ आई नौकरी एकाएक इस तरह से फिसल जाएगी, ऐसा परिवार ने सपने में भी नहीं सोचा था।
अरविंद के अनुसार, दस्तावेज की जांच के बाद घर में खुशी का माहौल था। नाते रिश्तेदारों को जैसे ही पता चला कि लड़का एसडीओ भर्ती हो गया है तो बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ था। घर परिवार और मोहल्ले में मिठाइयां बंट चुकी थी।
16 मार्च को उनके एक दोस्त का फोन आया। उसने उनका रोल नंबर पूछा और थोड़ी देर में दोबारा फोन करने की बात कही। कुछ देर बाद उसने अरविंद को फोन कर बताया कि एचपीएससी ने संशोधित परिणाम डाला है और उस लिस्ट में उसका नाम नहीं है। यह सुनते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने खुद चेक किया तो दोस्त की बात सही थी।