शहर में सैकड़ों लोग हैं , जिन्होंने अपने बच्चों की शादी और दूसरी चीजों के लिए जीवन भर की कमाई जोड़ कर रखी हुई है। एक - एक पाई करके 70 से 80 हजार रुपये तक जमा कर लिए थे। लेकिन अकाउंट न होने की वजह से अब उन्हें ये पैसा खोने का डर सता रहा है।
इनके पास बैंक में अकाउंट खुलवाने के लिए सारे दस्तावेज भी नहीं हैं। ये लोग इतने पढ़े लिखे भी नहीं हैं कि इन दस्तावेजों को आसानी से बनवा सकें। ऐसे में इनको अब ये जीवन भर की कमाई बर्बाद होने का डर सकता रहा है।
इनका कहना है कि हम लोगों ने जीवन भर काम करके 70 से 80 हजार रुपये जमा किए हैं। अब इन पर इतनी छानबीन की जा रही है। ऐसा लग रहा है जैसे हम लोगों ने ही काला धन रखा हुआ है। वहीं, कुछ लोगों के पास पेन कार्ड ही नहीं है। ऐसे में 50 हजार रुपये भी जमा नहीं किए जा रहे हैं।
अकाउंट ही नहीं तो कैसे जमा कराएं जीवन भर की कमाई
निठारी में रहने वाले 48 वर्षीय शंकर अपने पूरे परिवार के साथ सेक्टर - 20 में कपड़ों पर प्रेस करने का काम करते हैं। पिछले 30 सालों से लोगों के कपड़ों पर प्रेस कर रहे हैं। जनवरी में इनकी बेटी की शादी है। बेटी की शादी के लिए इन्होंने 60 हजार रुपये जमा किए हुए हैं।
लेकिन अब 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद होने की वजह से बैंक में पैसा जमा कराना चाह रहे हैं। लेकिन इनका बैंक में अकाउंट ही नहीं है। जिस वजह से इनको पैसे जमा करने में दिक्कत आ रही है। शंकर ने बताया कि बहुत साल पहले गांव में अकाउंट खुलवाया था। लेकिन उसके सभी दस्तावेज खो चुके हैं।
अब कोई अकाउंट ही नहीं हैं जिसमें पैसे जमा करा सकें। पुराने नोट बंद होने की वजह से कारोबार तो ठप हो ही गया है। सोचा था जनवरी तक कुछ और पैसे जमा हो जाएंगे तो शादी अच्छी हो जाएगी।
शंकर की पत्नी मंजू ने बताया कि समझ नहीं आ रहा है कि पैसे को कैसे नए नोटों में बदलवाएं। डर है कहीं पर ये पैसे बेकार न चले जाएं। एक बेटा 10 वीं और दूसरा बेटा 8 क्लास में पढ़ता है। महीने में इनकी 500 रुपये फीस जाती है। ऐसे में घर चलाना मुश्किल हो गया है।
वाट्सऐप ग्रुप से मिल रही है मदद
नोट पर लिखा तो होगी कार्रवाई
सेक्टर- 20 में रहने वाले अनिल कौशल इंजीनियर हैं। 500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने से इनकी लाइफ में भी उथल - पुथल हो गई है। हालांकि ये फैमिली प्रधानमंत्री के इस कदम के साथ हैं।
अनिल ने बताया कि एक दिन पहले दिन ही मकान मालिक को किराया देने के लिए अकाउंट से पैसा निकालकर लाए थे। लेकिन अब इनका कोई फायदा नहीं है। दोबारा से अकाउंट में जमा कराने पड़ेंगे। हालांकि मकान मालिक ने स्थिति को समझते हुए कुछ दिनों के बाद किराया देने को बोल दिया है।
वहीं दुध, सब्जी के लिए पेटीएम वाली दुकान को देखना पड़ा है। हालांकि हम लोग इस फैसले के साथ हैं। इससे कम से कम लोगों का काला धन बाहर निकल सकेगा। इसकेसाथ ही ऑफिस के सभी दोस्तों ने वाट्सऐप ग्रुप बना लिया है। जिसमें शामिल एक - एक शख्स अकाउंट से पैसे निकाल रहा है। उसके बाद सभी बांट ले रहे हैं। ऐसे ही हम अपना काम चला रहे हैं।