लॉकडाउन ने गोभी, टिंडा और घीया उगाने वाले किसानों के चेहरे से मुस्कान छीन ली है। मांग में कमी और मजदूर नहीं मिलने की वजह से किसान कम रेट पर सब्जियां बेचने को मजबूर हैं। आलम यह है कि पूरी दिल्ली में 90 फीसदी गोभी की मांग पूरा करने वाले गांव झाड़ौदा और डिचाऊ कलां से रोजाना सब्जियां लेकर जाने वाले वाहनों की संख्या भी करीब एक तिहाई कम हो गई है।
दोनों गांवों से दिल्ली की मंडियों में अमूमन करीब डेढ़ सौ गाड़ियों (डेढ़ लाख किलो) सब्जियां बिकने के लिए जाती हैं। लॉकडाउन के दौरान न तो तैयार फसलों की कटाई के लिए मजदूर मिल रहे हैं और न ही भाव। झाड़ौदा के पास के किसान देवेंद्र शौकीन बताते हैँ कि 20 मार्च के बाद से ही सब्जियों की मांग घटने लगी।
पहले मंडियों में किसानों को गोभी, घीया के भाव 15 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रहे थे, लेकिन अब यह छह-सात रुपये तक रह गया है। डिचाऊं कलां के किसान लोकेश का कहना है कि रोजाना मंडियों तक सब्जी पहुंचाने में 150 टैंपो का इस्तेमाल होता था। लेकिन लॉकडाउन के बाद से सब्जियों की मांग में 50 फीसदी तक की कमी आई है।