फरीदाबाद। फरीदाबाद से गुजर रहा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-दो) इन दिनों सुरक्षित नहीं है। धुंध और कोहरे ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।
इसके साथ ही कदम कदम पर यहां हादसे का अंदेशा रहता है। बदरपुर बॉर्डर से आगरा तक सिक्सलेन प्रोजेक्ट का काम चल रहा है। लेकिन इस काम को अंजाम दे रही निर्माण कंपनी लापरवाही बरतने में कोई कसर नहीं छोड़ रही।
हाईवे पर वाहन चालकों की सहूलियत के लिए कहीं कोई बंदोबस्त नहीं दिखता। जगह जगह गड्ढे, बीच सड़क पर पड़े सीवर लाइन के पाइप और सीमेंटेड बैरियर कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। हाईवे पर सफर करना कितना सुरक्षित है। इसे लेकर प्रस्तुत है संवाददाता राहुल श्याम की रिपोर्ट।
जानलेवा हो सकते हैं अवैध कट
हाईवे सिक्सलेन प्रोजेक्ट के चलते मुख्य चौराहों पर बने कट बंद कर दिए गए हैं। ट्रैफिक सिगनल भी ठप पड़े हैं। वैकल्पिक तौर पर चौराहों से दूर अस्थायी यू टर्न बनाए गए हैं।
वाहन चालक शॉर्टकट के लिए अवैध कटों का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे कई बार बड़े हादसे होते होते बचे हैं। कोहरे और धुंध में इस लापरवाही से दुर्घटनाओं की आशंका ज्यादा है।
सेक्टर-28 मेट्रो स्टेशन, ओल्ड फरीदाबाद चौक, अजरौंदा चौक, मेवला महाराजपुर और मैगपाई चौक के पास अवैध कट जानलेवा बन सकते हैं।
नई सड़क बन रही है हादसे की वजह
सिक्सलेन प्रोजेक्ट के तहत बाटा चौक के नजदीक सड़क की नई लेन बनाई गई है, जो पुरानी सड़क से दो से ढाई फीट ऊंची है।
बाटा चौक से यू-टर्न लेकर नीलम चौक की तरफ जाने वाले लोगों को इसके चलते जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। नई रोड पर दौड़ रहे वाहन अचानक गहराई में बनी पुरानी सड़क पर जाकर हादसे का शिकार हो जाते हैं। यहां दोनों सड़कों को समतल करना जरूरी है।
न संकेतक न बैरियर
नीलम चौक के नजदीक बल्लभगढ़ से दिल्ली जाने वाली सड़क को खोद दिया गया है। वाहन चालकों की जागरूकता के लिए न तो संकेतक बोर्ड लगाए गए हैं और न ही कोई बैरियर।
शुक्रवार आधी रात और शनिवार सुबह धुंध अधिक होने की वजह से यहां कई लोग दुर्घटना का शिकार होने से बच गए। कई जगह बोरियां मिट्टी भरकर रखी गई हैं, जिनसे कोई फायदा नहीं हो रहा।
सड़क पर डाल दिए पाइप और बैरीकेड
मेवला महाराजपुर के पास सड़क पर ही सीमेंटेड बैरिकेड पड़े हैं। इन से सड़क की दूरी मात्र दो-तीन फिट है, कोई भी वाहन सीधे इससे टकरा सकता है। थोड़ी दूरी पर ही सीवर लाइन के पाइप पड़े हैं।
वे भी साइड में सीधे करके नहीं रखे गए हैं बल्कि आड़े-तिरछे डाल दिए गए हैं। कोहरे और धुंध में वाहन इनसे टकराकर बड़े हादसे का शिकार हो सकते हैं।
गहरे गड्ढे और मिट्टी के ढेर
बड़खल मोड़ के पास एशियन अस्पताल की ओर से जाने के लिए कट बनाया गया था, जो चार दिन पहले बंद कर दिया गया है। यहां खुदाई शुरू हो गई है, खुदाई के कारण निकली मिट्टी के ढेर रोड के किनारे ही लगा दिए गए हैं।
बल्लभगढ़ की ओर जाने वाली रोड पर खुदाई के बाद कई स्थानों पर तीन-चार फीट तक गहरे गड्ढे हैं। इनके आगे बचाव के कोई संकेत नहीं लगाया गया है।
हाईवे पर वाहन चालकों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रख ट्रैफिक पुलिस प्रयास कर रही है। कोहरा की संभावना को देखते हुए जल्द ही हाईवे पर रिफ्लेक्टर और संकेतक बोर्ड लगा दिए जाएंगे। -मित्रपाल, एसएचओ-ट्रैफिक
धुंध और कोहरे में हादसों की आशंका ज्यादा होती है। ऐसे में प्रशासनिक लापरवाही जनता पर भारी पड़ जाती है। अवैध कट पार करने वालों का चालान होना चाहिए। साथ ही प्रशासन को चाहिए खुदाई वाली जगहों पर रिफ्लेक्टर व टेप आदि लगाए, जिससे वाहन चालकों को आसानी हो। -एसके शर्मा, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष, रोड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन
आंकड़ों पर एक नजर:
-151 लोग इस साल अक्तूबर तक गंवा चुके हैं सड़क हादसों में जान
-48 अवैध कट हैं बदरपुर बॉर्डर से सीकरी तक
-18 अवैध कट हैं सेक्टर 37 से मलेरना तक
(आंकड़े रोड सेफ्टी ऑर्गेनाईजेशन)