प्रॉपर्टी के जानकार योगेंद्र शर्मा की मानें तो करीब 10 साल पहले जिस वक्त यहां फ्लैट कल्चर शुरू हुआ था तो जिले में करीब 400 बिल्डरों ने जमीन खरीदी और करीब 10 हजार फ्लैट तैयार भी हो गए। ऐसे में लाखों संगठित व असंगठित मजदूरों को यहां काम मिला। जैसे ही बिल्डर दिवालिया होने शुरू तो तो एक-एक करके काम छिनता गया। जब काम नहीं मिला तो किसी ने सड़क पर अवैध रूप से ठेला लगाया तो किसी ने सब्जी की दुकान खोल ली। पूरा शहर अतिक्रमण की चपेट में आ गया। गांवों में सेक्टरों में लोगों ने मकानों की मंजिलें बढ़ा दीं, किराये का धंधा फल-फूल गया। अभी भी हजारों लोग रोजगार की तलाश में हैं। इन्हीं में से काफी युवाओं ने अपराध का रास्ता ही अपना लिया, जिसका शहर के लोग खामियाजा भुगत रहे हैं।
इसलिए मनाते हैं मजदूर दिवस
1 मई 1886 को शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले श्रमिकों के आंदोलन को शिकागो में कुचल दिया गया था। उस संघर्ष में कई श्रमिकों की जान गई थी। उनकी याद में ही मजदूर दिवस मनाया जाता है।
कुछ बड़ी घटनाएं
- ग्रेनो की ग्रेजियानो कंपनी में श्रमिक-प्रबंधन विवाद में एमडी ललित चौधरी की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।
- 2013 में नोएडा से लेकर ग्रेनो तक श्रमिकों ने कई कंपनियों को आग के हवाले कर दिया था।
- देवू मोटर्स कंपनी श्रमिक विवाद के कारण ही बंद हुई।
श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ देते हुए 2,75,17,349 रुपये की राशि से श्रमिकों को लाभान्वित किया है। पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 1,81,292 है। शोषित श्रमिकों को उनके लाभ दिलाए जा रहे हैं। - प्रभाकर मिश्र, सहायक श्रमायुक्त गौतमबुद्घनगर
जब मजदूरों को हर सुविधा मिलेगी तो विवाद नहीं होंगे। कंपनियों में अच्छे ढंग से काम होगा। मजदूरों के सुख दुख में साथ देने से अपनापन आएगा तो उद्यमियों व श्रमिकों के लिए अच्छा है। यही उद्यमियों को बताता रहता हूं। - आदित्य घिडिल्याल, अध्यक्ष ग्रेनो इंडस्ट्री एसोसिएशन
श्रमिकों के साथ अन्याय न हो, इसके लिए पूरा प्रयास किया जाता रहता है। कंपनियों में अच्छा वातावरण होगा तो उत्पादन भी बढ़ेगा। उसी हिसाब से श्रमिकों को हक देने का प्रयास किया जाता है। श्रमिकों का हक छीनना नहीं, देना चाहिए। - विपिन मल्हन, अध्यक्ष, नोएडा इंट्रेप्रिन्योर्स एसोसिएशन
बेरोजगारी बढ़ने से मजदूर दयनीय स्थिति में हैं। ठेकेदारी बढ़ने से न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता। मजदूरों से आठ घंटे की जगह 12 घंटे काम लिया जाता है। महंगाई के कारण एक कमरे में 10 मजदूर रहते हैं। आधे रात में काम करते हैं तो आधे दिन में। सरकारें भी मदद नहीं कर रही हैं। आज काम लिया कल निकाल दिया, यही श्रमिकों के साथ हो रहा है।
- गंगेश्वर दत्त शर्मा, अध्यक्ष सीटू