लेबरों को दी जा रही पुराने नोट में मजदूरी
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औद्योगिक नगरी में देश के विभिन्न हिस्सों से आकर फैक्ट्रियों में नौकरी करने वाले श्रमिकों को एक महीने बाद भी मालिकों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। श्रमिकों को महीने का वेतन अभी भी पुराने नोटों से देने का सिलसिला जारी है।
शहर के विभिन्न बैंक शाखाओं के बाहर ऐसे श्रमिक जरूर लाइन में खड़े नजर आएंगे, जिन्हें सैलरी पुराने नोट से दी गई है। अब वह बैंक में जमा कराने के लिए धक्के खाने को मजबूर हैं।
बिहार के रहने वाले संजय और उनकी बहन चंदावती यहां सरूरपुर स्थित एक फैक्टरी में नौकरी करते हैं। महीना बीतने के बाद फैक्टरी मालिक ने उन्हें वेतन के रूप में 1000 के पांच नोट पकड़ा दिए। दोनों का यहां के किसी बैंक में अकाउंट भी नहीं है।
ऐसे में उन नोटों को जमा कराने का संकट पैदा हो गया। एनआईटी पांच स्थित इलाहाबाद बैंक शाखा में सुबह पांच बजे से ही लाइन में लगे दोनों भाई बहन ने बताया कि अब वह इन पुराने नोटों को अपने गांव के अकाउंट में जमा कराने के लिए ही खड़े हैं। संजय और चंदावती ऐसे अकेले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग फैक्ट्री मालिकों की मनमानी का शिकार हो रहे हैं।