कुशाग्र बुद्धि और रुचि के बल पर दिल्ली के पंजाबी बाग निवासी कुशाग्र जुनेजा ने विश्व पटल पर भारत का परचम लहराया है।
कुशाग्र ने अर्जेंटीना के मेंडोजा में 2 से 11 दिसंबर के बीच हुई इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड (आईजेएसओ) का खिताब अपने नाम किया है। आईजेएसओ 2014 में हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों में से कुशाग्र को विश्व टॉपर घोषित किया गया।
उन्होंने व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर गोल्ड मेडल और एक्सपेरिमेंटल एग्जाम में सिल्वर मेडल जीता। मालूम हो कि ओलंपियाड में दुनिया भर के कुल 32 देशों ने हिस्सा लिया था।
पीतमपुरा के एपीजे स्कूल में 10वीं के छात्र कुशाग्र जुनेजा देश के उन छह टॉप छात्रों में से एक हैं, जिन्हें देश भर से अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से ओलंपियाड में हिस्सा लेने के लिए चुना गया था।
अभी विदेश में ही हैं कुशाग्र
फिलहाल कुशाग्र भारत वापस नहीं लौटे हैं। दसवीं की पढ़ाई के साथ-साथ कुशाग्र इंजीनियरिंग की तैयारी कराने वाले संस्थान फिट्जी के चार वर्षीय क्लासरूम के छात्र हैं।
इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड एक ऐसी प्रतियोगिता है जो विभिन्न देशों के सबसे प्रतिभाशाली बच्चों के बीच नेचुरल साइंस के क्षेत्र में आयोजित की जाती है।
फिट्जी संस्थान के निदेशक आरएल त्रिखा ने कुशाग्र की उपलब्धि पर कहा, ‘हमें गर्व है कि हम ऐसी प्रतिभा को सामने ला सके, जिसने वैश्विक स्तर पर हमारे देश को गौरवान्वित किया।
चार चरणों में होती है परख
इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड चार चरणों में आयोजित किया जाता है। इसका पहला चरण है नेशनल स्टैंडर्ड एग्जामिनेशन इन जूनियर साइंस। यह इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स की ओर से आयोजित किया जाता है।
इसमें सफल होने वाले छात्र अगले चरण की इंडियन नेशनल साइंस ओलंपियाड परीक्षा में हिस्सा लेते हैं। इसमें प्रदर्शन के आधार पर देश के 35 बेहतरीन छात्रों को तीसरे चरण के एग्जाम ओरिएंटेशन कम सेलेक्शन के लिए चुना जाता है।
उसमें सफल होने के बाद छात्रों को प्री डिपार्चर ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लेना होता है। सफल प्रतिभागी आखिर में इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड में हिस्सा लेते हैं।