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शाजिया पर फिसली कुमार विश्वास की जुबान

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आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास एक बार फिर विवादास्पद बयान देकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने विपक्षी पार्टी के नेताओं पर नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी से एक प्रमुख नेता के इस्तीफे के बाद उसके ईमान पर सवाल खड़ा कर दिया है।
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शनिवार को शाजिया इल्मी के आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने के बाद कुमार विश्वास ने रामचरित मानस की एक चौपाई ट्वीट की। जिसका मतलब है कि स्त्रियों के ईमान की परीक्षा तब होती है, जब इंसान बुरे वक्त में होता है।

इसे ट्विटर पर कुमार विश्वास की ओर से शाजिया इल्मी पर ताना मारने के रूप में देखा जा रहा है। इसी तरह से कुमार विश्वास पर एक बार फिर स्त्री विरोधी कॉमेंट करने के आरोप लग रहे हैं।
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क्या है ट्वीट?

दरअसल कुमार विश्वास ने शाजिया पर कॉमेंट करने के लिए तुलसीदास रचित रामचरित मानस की एक चौपाई का सहारा लेते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि 'धीरज धरम मित्र अरु नारी ! आपद् काल परखिए चारी !'

इसका शाब्दिक मतलब ये है कि धैर्य, धर्म, मित्र और नारी का असली परिचय इंसान को बुरे वक्त के आने से ही पता चलता है। लेकिन यह ट्वीट ऐसे वक्त पर किया गया है, जब आप के बुरे वक्त से गुजर रही है और शाजिया इल्मी ने पार्टी से इस्तीफा दिया है।

इसीलिए कुमार विश्वास इस ट्वीट को शाजिया इल्मी पर निशाना साधने के आरोप लग रहे हैं। लोगों ने ट्विटर पर ही इस ट्वीट का विरोध जताना भी शुरू कर दिया। लोगों ने इसे स्त्री विरोधी और महिलाओं का अपमान करने वाला ट्वीट ठहराया है।

स्मृति ईरानी और केरल की नर्सों पर फिसले

कुमार विश्वास इससे पहले भी अपने विवादित कॉमेंट्स पर फंस चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान केरल की नर्सों पर कुमार विश्वास के बयान को भी खूब उछाला गया था।

इस बयान में 2008 के किसी वीडियों में कुमार विश्वास रंगभेद कॉमेंट करते दिखाई दे रहे थे। हालांकि बाद में कुमार विश्वास ने इस बयान के लिए माफी मांग ली थी।

जबकि चुनाव प्रचार के दौरान अमेठी में उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार स्मृति ईरानी को कहा था कि भाजपा 'किसी ईरानी को उतारे या पाकिस्तानी' को, अमेठी लोकसभा क्षेत्र को अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इसमें पाकिस्तानी शब्द पर काफी हो-हल्ला मचा था।
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मुस्लिमों के एक त्योहार पर भी फिसले

कुमार विश्वास लगातार औरतों और धर्म पर विवादास्पद बयान देते रहे हैं। उन्होंने इसी साल जनवरी में कहा था कि एक बार लखनऊ गऐ थे। उस समय मुहर्रम का जुलूस निकल रहा था। लोग अपनी छाती पीटते हुए लोग कह रहे थे, हाय हुसैन...हाय हुसैन।

तो उसी समय कुमार विश्वास ने कहा कि हुसैन होते भी तो वो क्‍या कर लेते। इराक में सद्दाम हुसैन भी लटके थे तो क्‍या हो गया था। वहां एक विदेशी पर्यटक अंग्रेज भी था। उसने पढ़ा लिखा देखकर मुझसे पूछा कि यह क्‍या हो रहा है।

तो उन्होंने उससे कहा कि इनके फोरफादर यानी पुरखे मर गए हैं। इस पर अंग्रेज बोला-सो सैड। कब मर गए। तो उन्होंने कहा 1400 साल पहले। इस पर अंग्रेज ने कहा कि अरे बड़ी देर बाद पता चला। इस मामले में बाद में उन्होंने माफी मांगी थी।
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