विशेष जज अरुण भारद्वाज ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि यह एक भयानक मामला था, जिसमें सात लोगों के मौत के घाट उतार दिए गए थे। मामले की जांच यूपी पुलिस से सीबीआई को सौंपी गई। इतना ही नहीं सुनवाई को यूपी से दिल्ली स्थानांतरित करना पड़ा। बदकिस्मती से अभियोजन पक्ष के सभी गवाह मुकर गए। सुनवाई के दौरान यदि गवाहों को सुरक्षा दिया गया होता और ठोस सुबूत जुटाये जाते, तो केस का परिणाम कुछ और ही होता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी जांच
मृतक के परिजनों की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केस की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने लंबी जांच के बाद यूपी की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। मामला दिल्ली ट्रांसफर होने के बाद पहले इसकी सुनवाई तीस हजारी कोर्ट, पटियाला हाउस कोर्ट और फिर सांसदों विधायकों के लिए बनी विशेष अदालत में हुई।
विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड घटनाक्रम
- 29 नवंबर 2005- भाजपा के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय और छह अन्य की हत्या ।
- 21 फरवरी 2006- उत्तर प्रदेश पुलिस ने अदालत में पहला आरोपपत्र दायर किया। इसमें अफजल हक, अफजल अंसारी, प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी, अताउर्र रहमान और फिरदोस को नामजद किया गया था।
- 15 मार्च 2006- उत्तर प्रदेश ने दूसरा आरोपपत्र मुख्तार अंसारी के खिलाफ दायर किया।
- मई 2006- कृष्णानंद राय की पत्नी अल्का राय की मांग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का सीबीआई जांच का आदेश
- 30 अगस्त 2006- मामले में तीसरा आरोपपत्र सीबीआइ ने दायर किया, जिसमें संजीव माहेश्वरी को भी आरोपित किया गया।
- दिसंबर 2006- सीबीआइ ने चौथा आरोपपत्र दायर कर राकेश पांडे और रामू मल्लाह को नामजद किया।
- 20 मार्च 2007- पांचवां आरोपपत्र मंसूर अंसारी के खिलाफ दायर किया गया।
- 22 अप्रैल 2013- सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से दिल्ली की अदालत में ट्रांसफर की।
- 15 मार्च 2014- छठा आरोपपत्र मुन्ना बजरंगी के खिलाफ दायर किया गया।
- 3 जुलाई 2019- अदालत ने आरोपितों को बरी करते हुए अपना फैसला सुनाया।