क्यों हटाना जरूरी है?
सरकार ने कहा कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास मास्टर प्लान में कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) बिल्डिंग 4 और 5 का पुनर्विकास शामिल है। यह परियोजना राष्ट्र के शासन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। कदीमी मस्जिद परियोजना स्थल पर स्थित है और परियोजना के निष्पादन के लिए इसे हटाना आवश्यक है।
सरकार का तर्क और कानूनी आधार
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि और विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) ने एक हलफनामे में यह बात कही। हलफनामा मस्जिद के संरक्षकों की याचिका के जवाब में दायर किया गया था, जिसमें विध्वंस रोकने की मांग की गई थी। सरकार ने बताया कि कृषि भवन और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट परिसर धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक परिसर हैं। ये विशेष रूप से सरकारी, प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवा कार्यों के लिए समर्पित हैं। केंद्र ने यह भी कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर स्थित यह मस्जिद सरकारी भूमि पर है। नवंबर 1940 में हुए एक समझौते के तहत केवल मस्जिद के रूप में उपयोग के लिए अनुमति दी गई थी, जिससे भूमि पर कोई अधिकार या हित प्राप्त नहीं हुआ।
याचिकाकर्ताओं की मांग और सुनवाई
केंद्र ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता है। सरकार ने बताया कि कृषि भवन से दो किलोमीटर के दायरे में 'शाही मस्जिद ज़ब्ता गंज' पूरी तरह कार्यात्मक है। कदीमी मस्जिद 100 साल से अधिक पुरानी है और सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत इसे ध्वस्त किया जाना है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने पहले कहा था कि वे पुनर्विकास परियोजना को रोकना नहीं चाहते हैं। वे केवल नए ढांचे में एक प्रार्थना सुविधा की मांग कर रहे हैं, क्योंकि कदीमी मस्जिद दशकों से सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रार्थना स्थल रही है। न्यायमूर्ति अनीश दयाल के आदेश के बाद दायर इस हलफनामे पर अब 23 नवंबर को सुनवाई होगी।