निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को चार सितंबर को मेरठ जेल भेजा गया। तब से उसकी फांसी पर रोक लगने तक कोली के हाव-भाव में खास परिवर्तन नहीं हुआ। उसका व्यवहार सामान्य रहा। फांसी का डर भी नहीं दिखा।
जेल अधिकारियों का कहना है कि कोली ने हर दिन भरपेट भोजन किया। धार्मिक पुस्तक पढ़ता रहा। जब भी हाई सिक्योरिटी बैरक में पहुंचकर जेल अफसर ने पूछा कि कोली ठीक हो, तो उसने हां में ही जवाब दिया।
इसके अलावा उसने कोई खास इच्छा भी जाहिर नहीं की। सामान्य बंदियों की तरह ही समाचार पत्र भी पढ़े और उन्हीं की तरह खाना खाया।
यही नहीं डेथ वारंट पर 29 अक्तूबर तक रोक लगने की जानकारी कोली हुई, तब भी उसके व्यवहार में बदलाव नहीं आया। न पहले गम था, न अब खुशी है।