4. पढ़े लिखे बद्धिमान व्यक्ति के लिए हिंदी फिल्में एक तमाशे से ज्यादा और कुछ नहीं हैं। हमारी कहानियां उन्हें बचकानी, तर्कहीन और असलियत से दूर लगती हैं। हम तकनीक, नृत्य और कहानी में पश्चिमी फिल्मों की नकल करते हैं, कई बार तो पूरी फिल्म ही विदेशी फिल्मों की नकल होती है, कोई हैरानी नहीं कि आप इन फिल्मों पर हंसत होंगे पर आपमें से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो फिल्म स्टार बनने के सपने देखते होंगे।
5. मैं यह मानता हूं कि तमिलनाडु या बंगाल के लोगों में अपने पारंपरिक पहनावे को लेकर कोई हीन भावना नहीं है, वहां एक प्रोफसर से लेकर एक किसान तक किसी भी अवसर पर धोती पहनकर कहीं भी जा सकता है पर वहां भी उधार लिए गए विचार किसी न किसी शक्ल में सामने आते हैं, ये किसी ना किसी स्वरूप में हर जगह मौजूद हैं।
6. क्या कभी आप कॉलेज के किसी लड़के से सिर के बाल या दाढ़ी मूंछ मुंडवाने के लिए कह सकते हैं जबकि आजकल इसे बढ़ाने का फैशन है, पर अगर कल योग के प्रभाव में आकर यूरोप में विघार्थी ऐसा करने लगे तो मैं दावे से कह सकता हूं कि अगले ही दिन कनॉट प्लेस में आपको गंजे सिर दिखाई देंगे। योग को इसकी जन्मभूमि में प्रचलित होने के लिए यूरोप से ही सर्टीफिकेट लेना होगा।
7. टूटी फूटी हिंदुस्तानी सारे देश के लोग बोल और समझ लेते हैं। वह इसमें अपनी सारी व्याकरण मिलाकर प्रयोग करते हैं। इस तरह की भाषा में लड़की भी "जाता है" और लड़का भी "जाता है" होता है। इस तरह के माहौल में एक ऐसी आजादी मिलती है कि कई बार बुद्धिजीवी भी ऐसी भाषा बोलते हुए दिखते हैं और यही भारत की परंपरा है।
8. किसी भी सभा या सोसाइटी में यदि कोई जलसा हो तो वहां मंत्री जरूर आना चाहिए, नहीं तो फिल्म अभिनेता दोनों में से एक अध्यक्ष होगा और एक मुख्य अतिथि या इसका उलटा होगा, लेकिन किसी बड़े नाम का वहां होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि ये एक ब्रिटिश औपनिवेशिक परंपरा है।
9. ये हॉलिवुड के लइटमैन एक तरह के कवर के लिए बार्न डोर शब्द का प्रयोग करते हैं, बंबई फिल्म कर्मरारियों में इसे बंदर नाम दिया गया, वाह... कितना अच्छा बदलाव है। हिंदुस्तानी में कितनी संभावनाएं हैं कि वह अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली को आसानी से अपना लेती है।
10. भारत का शासक वर्ग आज यही कर रहा है, वह देश में ना इन्कलाब लाना चाहता है ना बुनियादी तब्दीली। अंग्रेजी की व्यवस्था कायम रखने में ही उसका फायदा है पर वह खुलेआम अंग्रेजों को अंगीकार नहीं कर सकता, राष्ट्रीयता का कोई ना कोई आडंबर खड़ा करना उसके लिए आवश्यक है।