दिल्ली सरकार ने अग्नि सुरक्षा के नजरिये से दिल्ली बिल्डिंग बाइलॉज-2016 में संशोधन कर दिया है। दिल्ली सरकार के गृहमंत्री सत्येंद्र जैन की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई अंतर विभागीय बैठक में इसका फैसला लिया गया। सरकार ने यह कदम 12 फरवरी को हुए करोल बाग हादसे के बाद उठाया है। होटल में आग लगने से 17 लोगों की मौत हो गई थी।
सत्येंद्र जैन ने बताया कि दिल्ली सरकार इस तरह के हादसों को रोकने के लिए सख्त है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि दिल्ली में भविष्य में करोल बाग जैसी दर्दनाक घटना दोहराई न जा सके। इसके लिए करोल बाग समेत पूरी दिल्ली के होटलों में सुरक्षा इंतजाम की जांच की जा रही है। किसी भी तरह की खामी मिलने पर होटलों को सील किया जा रहा है। इसी कड़ी में अब सरकार ने बिल्डिंग बाईलॉज में संशोधन किया है। 2016 के बाईलॉज में दस संशोधन किए गए हैं।
संशोधनों के बाद अब छतों व बेसमेंट में किचन नहीं होगा। कोई ज्वलनशील सामग्री छत पर नहीं रखी जाएगी। छत पर कोई अस्थायी ढांचा नहीं बनेगा। गलियारे, कॉरिडोर, सीढ़ी के निर्माण में लकड़ी व फोम जैसे ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल नहीं होगा। जरूरी होने पर नेशनल बिल्डिंग कोड के हिसाब से ही गैस बैंक लगाया जा सकेगा। चार मंजिल से ऊंची इमारतों में चलने वाले गेस्ट हाउस को फायर एनओसी नहीं मिलेगी।
फायर एनओसी लेते वक्त होटल मालिक को हर फ्लोर की स्वप्रमाणित निर्माण योजना की तीन हार्ड कॉपी व एक पीडीएफ कॉपी विभाग को देनी होगी। इसके साथ ही कार्बन मोनो ऑक्साइड स्मोक अलार्म, हर फ्लोर पर फायर डोर लगाना होगा। सभी गलियारों व कॉरिडोर को हवादार बनाना होगा।