सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों ने नए वर्ष का स्वागत शुभ के तौर पर खीर और हलवे के साथ किया। नव वर्ष के मौके पर बॉर्डर पर शुक्रवार को किसान वर्ग नई उमंग और नई जज्बे के साथ नजर आया। वहीं, किसानों ने साल की शुरुआत के साथ ही मांगे पूरी न होने तक बॉर्डर से न हटने का प्रण लिया।
सिंघु बॉर्डर पर सुबह से ही नए वर्ष को लेकर तैयारियां शुरू हो गई थी। दूर-दूर तक नए साल की चमक नजर आ रही थी। कोई गले मिलकर तो कोई अपने परिवार को वीडियो कॉल के माध्यम से बधाई दे रहा था। इस दौरान कुछ किसानों की परिवार से दूर होकर आंखें नम थी तो कोई परिवार के जल्द मिलने का वादा कर रहा था।
नए साल के जश्न में गाजर के हलवे व खीर की मिठास
किसानों ने नए साल के जश्न में गाजर के हलवे व खीर की मिठास को शामिल किया। इस दौरान गुड़ की खीर व मिठाई आदि बांटकर नया साल मनाया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी। आंदोलनरत एक किसान बलविंदर ने कहा कि नए साल की शुरुआत शुभ हो इसके लिए मीठे का लंगर लगाया गया है। इसका उद्देश्य केंद्र तक अपनी आवाज को नम्र रुप में पहुंचाना है। क्योंकि, किसान वर्ग किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करता है। वहीं, एक अन्य किसान हरदीप सिंह ने कहा कि नए साल की शुरुआत के लिए एक दिन पहले ही मेन्यू तय कर लिया गया था। इसमें गाजर का हलवा, खीर और अन्य मिठाइयों को शामिल किया गया था जिससे नए साल की शुरुआत शुभ हो।
नव वर्ष के अवसर पर दिल्ली से भी कई लोग सिंघु बॉर्डर पर सेवा करने के लिए पहुंचे। वहीं, कई लोगों ने दान भी किया। परिवार के साथ पहुंचे बच्चों ने भी लंगर में सेवा करने के साथ-साथ सफाई व्यवस्था आदि की जिम्मेदारी संभाली। सुबह से लेकर शाम तक दिल्ली से सेवा के लिए पहुंचने वाले लोगों का दौर जारी रहा। इस दौरान बॉर्डर से पहले ही गाड़ियों की लंबी लाइन भी लग गई थी जिसको संभालने के लिए यातायात पुलिस भी तैनात थी।
दिनभर चला भजन कीर्तन
किसानों ने नए वर्ष का स्वागत गुरबाणी और भजन-कीर्तन के साथ भी किया। सुबह से लेकर शाम तक के कई संगतों ने बॉर्डर पर गुरु का पाठ किया। वहीं, अन्य लोगों को भी धार्मिक रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान सिख धर्म से संबंधित वीर पुरुषों की वीरगाथा भी सुनाई गई।