वहीं, अनीता हर साल गरीब और अनाथ बेटियों के लिए सरगी भेजती हैं, ताकि किसी का त्योहार अधूरा न रहे। उनके लिए करवाचौथ केवल आस्था का नहीं, बल्कि प्रेम और मानवता का प्रतीक है। बीते साल उनके गोद लिए बेटे की पत्नी का हार्ट अटैक से निधन हो गया था, जिससे उनके घर में सन्नाटा छा गया, लेकिन अनीता ने हार नहीं मानी।
उन्होंने इस बार भी बहू की याद में सास वाली सरगी सजाई और कहा कि जिंदगी रुकती नहीं, बस रूप बदलकर आगे बढ़ती है। अगर मेरे हाथों से किसी का दिन मीठा हो जाए, तो वही असली पूजा है। रूही, जाह्नवी और अनीता जो कि किन्नर समाज की महिलाएं दिखाती हैं कि त्योहार सिर्फ परंपराओं का नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का अवसर है। वहां आस्था के साथ इंसानियत भी झलकती है।