प्रदेश के बच्चों को पोलियो ड्रॉप की जगह पोलियो टीका (वैक्सीन) लगेगा। यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) के तहत इस वैक्सीन को शामिल कर लिया गया है।
पोलियो के इस टीके को बच्चों को लगाए जाने वाले अन्य टीकाकरण के तरह ही लगाया जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर केंद्र सरकार इंजेक्टेबल पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) को 06 अप्रैल से हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश व उड़ीसा में लांच करेगी। बता दें कि इसे पहले हरियाणा अक्तूबर 2015 में शुरू करने का विचार था, लेकिन तकनीकी कारणों की वजह से इसे अब अमल में लाया जा रहा है।
दरअसल, प्रदेश में बीते दो साल से पोलियो का कोई मामला नहीं आया है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अब पोलियो ड्रॉप को बंद करना चाहता है। इसकी जगह बच्चों में अन्य टीके के साथ ही पोलियो का टीका देने का भी निर्णय लिया गया है।
यह टीकाकरण शुरू होने के बाद पल्स पोलियो अभियान को बंद कर दिया जाएगा। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक इसका सबसे अधिक फायदा हरियाणा के संवेदनशील जिलों में होगा। बता दें कि 2013 में डब्ल्यूएचओ ने भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया था। इसके बाद से लगातार पोलियो ड्रॉप अभियान चलाया जा रहा है। वैक्सीन लगने वाले बच्चों को लेकर डब्ल्यूएचओ एक अध्ययन करेगी। इसके सकारात्मक रिजल्ट के बाद बंद करने पर विचार किया जा सकता है।
संवेदनशील जिले को अधिक फायदा
हरियाणा में मेवात की स्थिति सबसे खराब है। पूरे प्रदेश में जहां 60 फीसदी से अधिक पोलियो की खुराक हर अभियान में पिलाई जाती है। मेवात में अधिकतम 12 फीसदी बच्चे ही पोलियो ड्रॉप पीते हैं। पोलियो अभियान को मजहब से जोड़ दिया जाता है, जिसकी वजह से लोग इस अभियान में दिलचस्पी नहीं लेते हैं। गुड़गांव, फरीदाबाद, मेवात समेत 13 जिलों को संवेदनशील की श्रेणी में रखा है। मेवात जिले का अधिकांश हिस्सा अति संवेदनशील है। टीका शुरू होने के बाद इन जिलों को अधिक फायदा होगा। टीकाकरण पर आपत्ति भी नहीं होगी।
डॉ. धीरेंद्र त्यागी, डब्ल्यूएचओ अधिकारी: वैक्सीन लगाने को लेकर बहुत पहले ही निर्णय हो चुका था। अब विभागीय तौर पर इसकी शुरुआत की जा रही है। अन्य टीका के तरह ही बच्चों को यह टीका लगाया जाएगा। सभी आशा वर्कर और टीकाकरण में लगे कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है।