भारत-बांग्लादेश किडनी रैकेट मामले में नया खुलासा हुआ है। इस मामले में दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के एक कर्मचारी की मिलीभगत सामने आई है। कर्मचारी 20 हजार रुपये लेकर किडनी डोनर व प्राप्तकर्ता की नकली फाइल को क्लीयर कर देता था। इससे यह साबित हो जाता था कि दोनों आपस में रिश्तेदार हैं। जांच आगे बढ़ाने के लिए अब दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेश उच्चायोग को पत्र लिखा है।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेश उच्चायोग में तैनात कर्मचारी का नाम रूहुल अमीन है। यह चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी है। उच्चायोग में सत्यापन के लिए जो भी मेल आते थे, उनका जवाब यही कर्मचारी तैयार करता था। मेल रिबर्ट भी यहीं से होता था।
अस्पताल प्रशासन की ओर से जब कागजात उच्चायोग में सत्यापन के लिए आते थे तो गिरोह सरगना रसेल को पता लग जाता था। वह इस कर्मचारी से नकली फाइल को तुरंत क्लीयर करवा लेता। कर्मचारी इसके लिए 20 हजार रुपये लेता था और फाइल को जल्दी क्लीयर करवा देता था।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस कर्मचारी के साथ उच्चायोग का कोई और कर्मचारी तो मिला हुआ तो नहीं है। दिल्ली पुलिस ने विदेश मंत्रालय के जरिये बांग्लादेश उच्चायोग को पत्र लिखा है। दिल्ली पुलिस ने पूछा है कि क्या ये कागजात उच्चायोग की ओर से सत्यापित किए गए हैं। अब तक कितनी फाइलों का सत्यापन किया गया है।
दिल्ली पुलिस ने ये भी पूछा है कि क्या ये मोहर उच्चायोग की हैं। ये कर्मचारी उच्चायोग में कब से तैनात हैं। हालांकि दिल्ली पुलिस को पत्र लिखे हुए कई दिन हो गए हैं, मगर अभी तक बांग्लादेश उच्चायोग ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा चुका है।