नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त मामले में पुलिस अब उन परिवारों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है, जिन्होंने बच्चे खरीदे थे। आरोपियों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि पिछले डेढ़ वर्ष में 30 से अधिक नवजात बच्चों का सौदा हुआ। पुलिस खरीदार परिवारों के साथ पूरे नेटवर्क की कुंडली खंगाल रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक 24 ऐसे परिवारों की पहचान की जा चुकी है, जिन्होंने गिरोह से बच्चे खरीदे थे। ये परिवार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में रहते हैं। इन तक पहुंचने के लिए पुलिस ने तीन अतिरिक्त जांच टीमें गठित की हैं। अधिकारियों का कहना है कि रैकेट में कई अन्य लोगों की भी भूमिका सामने आ रही है, जिनकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। जांच के तहत शुक्रवार को पुलिस की एक टीम बेगमपुर स्थित डॉ. विवेकी के हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंची।
यहां से बड़ी मात्रा में दस्तावेज और अन्य अहम साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पिछले कुछ वर्षों में यहां कितने बच्चों के जन्म दर्ज किए गए और उनके जन्म प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी हुए। जांच में सामने आया है कि अस्पताल कथित तौर पर नवजात तस्करी के नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बना हुआ था। यहां बच्चों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें खरीदारों को सौंपा जाता था, जिससे बच्चे को खरीदार दंपती की संतान के रूप में दर्शाया जा सके।
पुलिस लगातार प्रतिभा नामक महिला से भी पूछताछ कर रही है, जिसकी भूमिका बच्चों के खरीदार तलाशने में बताई जा रही है। उसने पूछताछ में कुछ अन्य अस्पतालों के नाम भी बताए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
कालिया बच्चों की व्यवस्था करता
अधिकारियों के अनुसार, इस रैकेट के मुख्य सरगना डॉ. विवेकी, साएबा भाई घमर उर्फ कालिया और प्रतिभा हैं। कालिया बच्चों की व्यवस्था करता था, डॉ. विवेकी कथित रूप से दस्तावेज तैयार कराती थीं, जबकि प्रतिभा और उसकी सहयोगी ओमवती खरीदारों से संपर्क साधती थीं। जांच में यह भी पता चला है कि प्रतिभा और ओमवती पहले भी इसी तरह के मामले में जेल जा चुकी हैं। गौरतलब है कि मध्य जिला पुलिस ने हाल ही में कई राज्यों में सक्रिय इस गिरोह का भंडाफोड़ कर 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें पांच ऐसे लोग भी शामिल थे, जिन्होंने नवजात बच्चे खरीदे थे। पुलिस ने उनके कब्जे से पांच नवजात बच्चों को भी सुरक्षित बरामद किया था।