गाजियाबाद के व्यापारी विवेक को सकुशल छुड़ाने की कहानी किसी बॉलीवुड़ फिल्म से कम नहीं, जिस पर एकाएक यकीन नहीं होता। मगर पुलिस अफसरों और अगवा कारोबारी की मानें तो अपहर्ताओं पर ‘इमोशनल अत्याचार’ किया गया, जिससे वे बिना फिरौती लिए ही कारोबारी आरडीसी छोड़कर गए।
हालांकि पुलिस अफसरों का कहना है तरीका सही नहीं था, लेकिन कारोबारी को बचाने के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ा। दरअसल, फिरौती के लिए आई कॉल से पुलिस ने बालकांत को पकड़ा, जिससे अन्य अपहर्ताओं का पता किया।
फिर पुलिस ने कुछ ऐसा किया जो असल जिंदगी में शायद ही आपने सुना हो। ऐसा तरीका जो जिससे अगवा व्यापारी बड़ी आसानी से छूटकर अपने घर आ सका।
एक गलती पड़ी किडनैपरों को भारी
बता दें कि पुलिस अफसरों ने जिस बालकांत को पकड़ा था, उससे अन्य अपहर्ताओं का पता लगाया। बालकांत से ही अपहर्ताओं के मोबाइल नंबर पुलिस ने लिए और परिवारवालों को उठा लिया।
अपहर्ताओं को पुलिस ने फोन पर फायरिंग और उनके रोते-बिलखते परिजनों की आवाज सुनवाई। अपहर्ताओं ने पुलिस से समझौता किया कि वे कारोबारी को बिना फिरौती लिए छोड़ देंगे, लेकिन पुलिस को उनके परिजनों को छोड़ना होगा।
पुलिस ने कुछ परिजन छोड़े, जबकि कुछ को पकड़े रखा। एसएसपी ने बताया कि अपहर्ता विवेक को आरडीसी छोड़ गए और पुलिस को फोन कर खबर भी कर दी।
पुलिस की नाकामी भी आई सामने
पुलिस ने बाकी आरोपियों पर शिकंजा कस दिया है, जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वारदात ने पुलिस अलर्टनेस की भी पोल खोलकर रख दी है। न सिर्फ गाजियाबाद की, बल्कि नोएडा, हाथरस और मथुरा पुलिस की भी।
दरअसल, आरडीसी से अपहर्ता कारोबारी की आंखों पर पट्टी और हाथ-पैर बांधकर एक्सप्रेस वे से नोएडा, हाथरस होते हुए मथुरा ले गए थे। ये करीब 200 किलोमीटर है।
रास्ते में गाजियाबाद के अलावा तीन जिले और पड़ते हैं। कविनगर के अलावा नौ और थाने और उनकी चेकपोस्ट आती हैं। रास्ते में कहीं पुलिस ने कार को चेक नहीं किया।
पहचान वालों ने बनाई थी विवेक के किडनैपिंग की प्लानिंग
सीओ द्वितीय रणविजय सिंह और कविनगर एसएचओ अवनीश गौतम ने बताया कि अपहरण की प्लानिंग जिम ट्रेनर और उसके प्लांट संचालक दोस्त भारत ने बनाई थी।
दरअसल, विवेक एक जिम में जाता है, जहां जिम ट्रेनर भी जाता है, उसने एमबीए कर वाटर प्लांट चला रहे चिपियाना में रह रहे भारत को बताई। भारत ने रघुवीर और रोहित से संपर्क कर अपहरण कराया और फिरौती मांगी।
विवेक ने बताया कि मंगलवार रात घर पर दाल बनी थी, जिस कारण मैं पहलवान के ढाबे से स्पाइसी खाना लाया। वापस लौटते समय करीब साढ़े 10 बजे पीछे से एक कार ने मेरी कार में टक्कर मार दी।
घर में बनी दाल खा ली होती तो नहीं होती किडनैपिंग
इसके बाद विवेक ने बताया कि, 'मैं कार से नीचे उतरा और कार चालक से नाराजगी जताकर अपनी कार चेक करने लगा कि कहीं डैमेज तो नहीं हुई। चार लोग पीछे से आए और उन्होंने मुझे पकड़ लिया।'
'एक ने तमंचे की बट सिर में मारी, जिससे खून बहने लगा। खुद को बचाने के लिए मैं बदमाशों से कुछ देर जूझा, लेकिन बदमाशों ने मुझे अपनी कार में डाल लिया। आंखों पर पट्टी बांध दी। हाथ-पैर बांध दिए। चेन, अंगूठी और जेब में रखे हजारों रुपये लूट लिए।'
'अपहरण करने के बाद बदमाशों ने पूरी रात कार ड्राइव की, रास्ते में मेरा मोबाइल और कार की चाभी फेंक दी। सुबह किसी भूसे के कोठे में ले जाकर बंद कर दिया। मुझसे मेरे पैरेंट्स के मोबाइल नंबर लिए और कामकाज के बारे में जानकारी ली।'
'बुधवार शाम बदमाश मुझे फिर से कार में बैठाकर ले गए। एक फार्म हाउस में रखा। इसके अलावा एक पेड़ के नीचे चादर डालकर रात को वहां पर लेटने के लिए कहा। खाना खाने के लिए पूछा तो मैंने मना कर दिया।'