वर्ष 1986 में आरोपी गुरसेवक उर्फ बाबला ने अपने साथियों के साथ मिलकर केसीएफ चीफ जरनैल लाभ सिंह व आतंकी गुरिंदर पाल सिंह भोला को पुलिस कस्टडी से छुड़ाने के लिए जालंधर के कोर्ट परिसर में हमला कर दिया था। आरोपियों ने न सिर्फ दोनों को छुड़ा लिया, बल्कि हमले के दौरान पंजाब पुलिस के आठ जवानों की इन लोगों ने गोलीबारी के दौरान हत्या कर दी। इसके कुछ समय बाद ही 1986 में पंजाब पुलिस ने बाबला को दोबारा गिरफ्तार कर लिया। इससे पूर्व इन लोगों ने पंजाब के एक थाने पर धावा बोलकर वहां से 16 रायफल,6 कारबाइन, कारतूस, दो रिवॉल्वर, पुलिस जीप व एक कार लूट ली थी। वहीं गिरफ्तारी से पूर्व आरोपियों ने एक ही परिवार के नौ लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। गिरफ्तारी के बाद उसे 1986 में दिल्ली की तिहाड़ जेल में हाई रिस्क वार्ड में बंद कर दिया गया। 2004 तक वह 18 साल जेल में बंद रहा।
तिहाड़ में होने के बावजूद चलाता रहा आतंकी गतिविधियां
जेल में बंद होने के बावजूद आरोपी बाबला आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा। पाकिस्तान में बैठे आतंकियों की मदद से वह दिल्ली में बड़े हमले की साजिश रचता रहा। आरोपी ने पाकिस्तान से एके-47, विस्फोटक व अन्य सामान मंगाने शुरू किए। इसी कड़ी में 9 जुलाई, 1997 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पंजाबी बाग से 18 किलोग्राम आरडीएक्स, एक एके-47, 100 कारतूस, दो पिस्टल, पांच मैगजीन, 130 कारतूस, आठ हैंड ग्रेनेड, 10 फ्यूज, चार एबीसीडी टाइमर्स बैट्री के साथ और डेटोनेटर्स बरामद हुए। इस मामले में बाबला की जेल में ही औपचारिक गिरफ्तारी की गई।
2004 में दोबारा तीस हजारी कोर्ट से हुआ फरार
वर्ष 2004 में तीस हजारी कोर्ट में पेशी के दौरान आरोपी पुलिस कस्टडी से दोबारा फरार हो गया। इस संबंध में दिल्ली के सब्जी मंडी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद आरोपी को पुलिस ने लुधियाना इलाके से दबोच लिया। उसके खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया। 2010 में वह जेल से दोबारा बाहर आया। इसके बाद वह लगातार गिरफ्तार होता रहा और जमानत पर छूटता रहा। इस बीच वह पाकिस्तान में बैठे केसीएफ चीफ परमजीत सिंह पंजवाद के संपर्क में आया। आरोपी भारत में अपना संगठन खड़ा करना चाह रहा था। इस बीच 2017 में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने अवैध हथियार के मामले में आरोपी को दबोच लिया। बाद में वह रिहा होने के बाद कोर्ट नहीं आया। फिलहाल उसके खिलाफ दो मामलों में गैर-जमानती वारंट था।