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खबर जो खो गईः गुरुग्राम में था नीतू का हत्यारा, आठ साल तक ऐसे बचता रहा पुलिस से

Fri, 28 Jun 2019 06:06 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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neetu solanki raju gehlot - फोटो : सोशल मीडिया
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रोहन दहिया के सहकर्मी और बॉस बताते हैं कि वह एक शांत स्वभाव वाला और पेशेवर व्यक्ति था। वह काम में अच्छा था और उसने कभी छुट्टी नहीं ली, न ही कभी अपने सीनियर्स से बहसबाजी की। गुरुग्राम स्थित एक ई-कॉमर्स कंपनी में काम करने वाले रोहन के सहकर्मी बताते हैं कि वह अपने काम में काफी दक्ष था और बहुत इज्जतदार था।

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हालांकि उनमें से कोई रोहन दहिया के बारे में सबकुछ नहीं जानता था क्योंकि रोहन दहिया नाम का कोई है ही नहीं। बल्कि वो सब जिस आदर्श कर्मचारी के बारे में बात कर रहे हैं वो राजू गहलोत है। यह वही राजू है जो 2011 से अपने लिव-इन-पार्टनर नीतू सोलंकी की हत्या के मामले में वांछित था।

नीतू सोलंकी वही हत्याकांड है जो पूरे देश की मीडिया में सुर्खियां बना था। 2011 में जब नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर एक बैग में महिला का शव मिला था तो पहली बार इस हत्या का मामला सामने आया था। इस महिला की पहचान काफी मुश्किल थी और सिर्फ उसकी कलाई पर बना मोर का टैटू ही वो पहचान था जिसने पुलिस की मदद की।
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जिंदा रहते हुए दिल्ली पुलिस आरोपी राजू गहलोत तक नही पहुंच पाई, लेकिन मौत के बाद पुलिस को उसका पता चला। राजू गहलोत ने गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में लिवर की बीमारी के कारण दम तोड़ दिया। मशहूर टैटू गर्ल हत्याकांड के बाद करीब 8 साल तक राजू पुलिस की आंखों में धूल झोंककर गुरुग्राम में नाम बदलकर रहता रहा। इस बीच उसने अपने परिवार से भी कभी संपर्क भी नहीं किया।

राजू पर 2 लाख का इनाम भी घोषित था

नीतू सोलंकी के हत्यारोपी की मौत - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को अंतिम सांस लेने से पहले उसने अपनी मां को कॉल कर जब बीमारी की खबर दी तो पुलिस टीम गुरुग्राम के पारस अस्पताल पहुंची, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। परिजनों ने बुधवार को उसका अंतिम संस्कार कर दिया। हत्याकांड के समय राजू 15 मोबाइल और 15 सिमकार्ड का इस्तेमाल करता था। उस पर 2 लाख का इनाम भी घोषित था।

राजू गहलोत के दफ्तर जाने पर पता चला कि उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए हर वो तरीका अपना रखा था जिससे उसे कोई किसी भी कीमत पर पहचान न सके। 2017 से वह गुरुग्राम की एक ई-कॉमर्स कंपनी में काम कर रहा था। उसके एक नियोक्ता का कहना है कि हम सभी हैरान रह गए जब पुलिस ने हमें बताया कि रोहन यानी राजू एक जघन्य हत्या के मामले में शामिल था।

राजू के नियोक्ताओं का कहना है कि जब उसने कंपनी ज्वाइन की थी तो उसके पास सारे पहचान पत्र जैसे- आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और 12वीं की मार्कशीट आदि रोहन दहिया के नाम पर ही थे। उन्होंने बताया कि ऑफिस में सेल्स बैकग्राउंड वाले शख्स के लिए वैकेंसी थी और रोहन ने उन्हें बताया था कि वो गुरुग्राम की एक मार्केटिंग फर्म के साथ काम कर चुका है। वैसे तो राजू के सहकर्मियों को ये बात स्पष्ट रूप से नहीं पता कि वह ये कंपनी ज्वाइन करने से पहले क्या करता था लेकिन उसने ये जरूर बताया था कि कुछ समय तक उसने यूरोप में काम किया था।

2006 में एयर इंडिया में क्रू मेंबर के रूप में काम करना शुरू किया

नीतू सोलंकी के हत्यारोपी की मौत - फोटो : सोशल मीडिया
सच्चाई तो ये है कि नीतू सोलंकी की हत्या से पहले उसने दिल्ली विश्वविद्यालय में कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज से स्नातक किया। फिर टूरिज्म में मास्टर्स की डिग्री ली और फिर फ्रेंच भाषा में डिप्लोमा लिया। उसने 2006 में एयर इंडिया में क्रू मेंबर के रूप में काम करना शुरू किया और इसी वजह से उसे एयर इंडिया कॉलोनी, वसंत विहार में रहने के लिए घर मिल गया। जब उसने काम पर जाना बंद किया तो उसका घर भी लॉक कर दिया गया।

राजू गहलोत गुरुग्राम में जिस कंपनी में काम करता था वहां उसकी सैलरी 16000 प्रति माह थी। चार महीने पहले ही उसका टीम लीडर के तौर पर प्रमोशन हुआ था और उसकी सैलरी बढ़कर 24000 रुपये हो गई थी। राजू अक्सर इवनिंग शिफ्ट में ही काम करता था। हमेशा समय से दफ्तर पहुंचने वाले राजू की ऑफिस के बाहर कोई जिंदगी नहीं थी।

हालांकि राजू के एक सहकर्मी ने बताया कि वह स्मार्टफोन नहीं बल्कि नोकिया का की पैड वाला फोन रखता था। वह बहुत शराब भी पीता था। जब एक हफ्ते पहले वह बीमार हुआ तो उसके सहकर्मियों ने 2 लाख रुपए मिलकर जुटाए क्योंकि राजू के परिवार का कुछ पता नहीं था।
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राजू भाग गया था आगरा

नीतू सोलंकी - फोटो : अमर उजाला
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी आगरा भाग गया। वहां से उसने अपने कजिन नवीन शौकीन को कॉल कर नीतू हत्याकांड की जानकारी दी। बाद में राजू दिल्ली नवीन के पास पहुंचा और 3-4 दिन उसके पास रुका। नवीन से 10 हजार रुपये लेकर वह चला गया। पुलिस ने नवीन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस टीम राजू की तलाश में मुंबई, गोवा और देश के दूसरे हिस्सों में दबिश देती रही।

इसके बाद पता चला कि वह नेपाल भाग गया। आरोपी अपने 15 मोबाइलों को गोवा और महाराष्ट्र में बेचता रहा। पुलिस उन मोबाइल को ट्रैक कर वहां पहुंची भी, लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। मंगलवार को जब राजू ने बीमारी के बाद परिवार को कॉल की तो उसका पता चला। पुलिस के पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।

गुरुग्राम में छिपा रहा आरोपी

राजू की तलाश में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा देश के कोने-कोने खंगाल डाले, लेकिन आरोपी नाम व पहचान छिपाकर गुरुग्राम में रहता रहा। उसने फर्जी कागजात बनवाकर अपना नाम रोहन दहिया रख लिया। वह कई निजी कंपनियों में नौकरी करता रहा। फिलहाल वह कोचर ऑटोमोबाइल्स नामक कंपनी में रिटर्निंग ऑफिसर की नौकरी कर रहा था। आरोपी समय से दफ्तर पहुंचता और देर से दफ्तर छोड़ता। अस्पताल से पुलिस को पता चला कि राजू लिवर की गंभीर बीमारी के बाद खुद ही अस्पताल में भर्ती हुआ था। जब उसे लगा कि अब वह नहीं बचेगा तो उसने परिवार को कॉल की।

कौन थी टैटू गर्ल नीतू सोलंकी

नवादा निवासी नीतू परिवार के साथ रहती थी। पिता की डेयरी के अलावा प्रॉपर्टी का भी कारोबार था। नीतू ने डीयू से लॉ करने के बाद कई नामी कॉल सेंटर में काम किया। मार्च 2010 में अचानक जॉब करने के दौरान उसने परिजनों को बताया कि उसकी सिंगापुर में नौकरी लग गई है। अप्रैल 2010 में वह सिंगापुर जाने की बात कर घर से चली गई।

परिजनों से वह वेबकैम और मोबाइल से संपर्क में रही। हत्याकांड से कुछ दिन पूर्व उसके माथे में चोट लगी देखकर छोटी बहन ने पूछा तो उसने एक्सीडेंट होने की बात की थी। जब नीतू का शव बरामद हुआ तो परिवार को पता चला कि वह कभी सिंगापुर नहीं गई थी, बल्कि भारत के अलग-अलग शहरों में वह राजू के साथ रही।
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