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अब केजरीवाल क्या करेंगे?: ये रहा इस बात का जवाब, बनाई है खास रणनीति; एक तीर से साधे कई निशाने

Wed, 18 Sep 2024 03:30 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

करीब एक दशक से सियासी पारी खेल रहे अरविंद केजरीवाल ने सधी रणनीति के तहत आतिशी को मुख्यमंत्री बनाकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं।
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आप नेता अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद संगठन को मजबूती प्रदान करने में जुटेंगे। चुनावी राज्यों में वह अपना ध्यान केंद्रित करेंगे। इसे लेकर पार्टी ने भी खास रणनीति तैयार की है। दिल्ली विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने और लोगों के बीच विश्वास बहाल करने पर उनका ध्यान केंद्रित रहेगा।

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भ्रष्टाचार के आरोपों में केजरीवाल की लंबे समय से गिरफ्तारी के कारण आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ता कमजोर हुए हैं। लिहाजा वह कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयार करेंगे। केजरीवाल हरियाणा में चुनाव प्रचार में भी अहम भूमिका निभाएंगे। रोड शो के साथ ही प्रचार अभियान में जुटेंगे। 

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि दिल्ली में वार्ड स्तर पर योजना बनाकर घर-घर जाकर प्रचार करने की योजना बनाई गई है। दिल्ली विधानसभा चुनाव पांच महीने बाद हैं, लिहाजा मतदाताओं के बीच विश्वास फिर से बनाना बेहद अहम है। न केवल पार्टी के वरिष्ठ नेता, बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं का विश्वास भी जीतने की कोशिश करेंगे। पार्टी को मजबूती प्रदान के लिए पंजाब का भी दौरा करेंगे। झारखंड और महाराष्ट्र में भी संगठन को मजबूती देंगे।

सधी सियासत... एक तीर से केजरीवाल ने साधे कई निशाने
करीब एक दशक से सियासी पारी खेल रहे अरविंद केजरीवाल ने सधी रणनीति के तहत आतिशी को मुख्यमंत्री बनाकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। कई विधायकों की मांग के बावजूद पत्नी सुनीता केजरीवाल को मुख्यमंत्री न बनाकर केजरीवाल ने परिवारवाद के आरोपों की धार कुंद की है जबकि केजरीवाल के जेल में रहने के दौरान जब उनकी पत्नी लोकसभा और हरियाणा विधानसभा चुनाव में फ्रंट पर थीं, तब विपक्ष इस तरह के आरोपों से आप को घेरने की कोशिश करता रहा है।

वहीं, महिला मुख्यमंत्री देकर केजरीवाल ने आधी आबादी को साधने की कोशिश की है। खासतौर से इसलिए भी कि दिल्ली की दो बड़ी जीतों में माना जाता है कि आप महिलाओं की पसंदीदा पार्टी है। आप ने इसका तोहफा देते हुए बसों में महिलाओं की यात्रा मुफ्त कर दी है। वहीं, आंदोलन के दिनों की साथी को अपना पद सौंपकर कार्यकर्ताओं को भी गहरा संदेश दिया है। इससे उन आरोपों को भी खारिज किया जा सकेगा, जिसमें आप को ''वन मैन आर्मी'' वाली पार्टी कहा जाता है। भाजपा के साथ इस तरह के आरोप आप के ऐसे कई संस्थापक सदस्य भी लगाते रहे हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी है।

केजरीवाल की छवि त्याग वाली उभरेगी
आतिशी को मुख्यमंत्री बनाने से अरविंद केजरीवाल की छवि एक त्याग वाली बनकर उभरेगी। विपक्ष बराबर आरोप लगाता रहा है कि कुर्सी के मोह की वजह से भी जेल से ही वह सत्ता चला रहे थे। मुख्यमंत्री का पद वह छोड़ना नहीं चाह रहे थे। जेल से बाहर आते ही सधे हुए राजनीतिज्ञ की तरह उन्होंने यह भी साबित कर दिया कि उन्हें कुर्सी का मोह नहीं है और न ही परिवारवाद को बढ़ावा देने वाला। लिहाजा महिला कार्ड के साथ ही केजरीवाल ने एक तरह से सत्ता के लोभ से ऊपर उठकर आतिशी को कुर्सी सौंपने का निर्णय लिया।

एलजी के साथ अब महिला सीएम का होगा टकराव
उपराज्यपाल के निशाने पर आए केजरीवाल ने इस स्ट्रोक से उन्हें भी साधने की कोशिश की है। केजरीवाल के इस फैसले से अब सीधा महिला मुख्यमंत्री से टकराव होगा। ऐसे में वह यह साबित कर सकेंगे कि एलजी से टकराव न केवल केजरीवाल से है बल्कि उन्हें आम आदमी पार्टी से ही दुराव है। वह नहीं चाहते हैं कि आंदोलन से उभरी पार्टी दिल्ली की सत्ता में रहे। विधानसभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा काफी उठेगा।
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केंद्र की भाजपा सरकार को भी होगी दिक्कत
केंद्र सरकार के निशाने पर अरविंद केजरीवाल बराबर रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व बराबर उन्हें कटघरे में खड़ा करता रहा है। आतिशी के मुख्यमंत्री बनने पर एक महिला पर आरोप मढ़ना भाजपा के लिए भी आसान नहीं होगा। इस नीति से केजरीवाल यह साबित कर सकेंगे कि केंद्र की भाजपा सरकार आधी आबादी के खिलाफ है। यह संदेश लेकर वह अन्य राज्यों के चुनाव में उतरेंगे।

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